सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : H. pylori संक्रमण से बढ़ सकता है पेट के कैंसर का खतरा
पेट में पाया जाने वाला Helicobacter pylori यानी H. pylori एक आम बैक्टीरिया है, जो लंबे समय तक शरीर में मौजूद रहने पर पेट की अंदरूनी परत में सूजन और अन्य समस्याएं पैदा कर सकता है। हालिया रिपोर्ट में लैंसेट ऑन्कोलॉजी के अध्ययन के हवाले से बताया गया है कि 2024 में दुनियाभर में संक्रमण से जुड़े करीब 23 लाख कैंसर मामलों में लगभग 7.6 लाख मामले H. pylori से संबंधित थे। भारत में इससे जुड़े करीब 47 हजार मामले बताए गए हैं।
H. pylori संक्रमण हर व्यक्ति में कैंसर का कारण नहीं बनता। कई लोगों में यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक रह सकता है। हालांकि, लंबे समय तक संक्रमण रहने पर पेट में लगातार सूजन हो सकती है, जिसके बाद एट्रोफिक गैस्ट्राइटिस, कोशिकाओं में बदलाव और कुछ मामलों में पेट के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के अनुसार, H. pylori को मानव में कैंसर पैदा करने वाला कारक माना गया है और इसका संबंध गैस्ट्रिक कैंसर तथा MALT लिंफोमा से है। इस संक्रमण के संभावित लक्षणों में पेट में दर्द या जलन, पेट फूलना, भारीपन, बार-बार डकार आना, उल्टी, भूख कम लगना और वजन घटना शामिल हो सकते हैं। हालांकि, संक्रमित व्यक्ति में कोई लक्षण दिखाई न देना भी संभव है।
H. pylori की जांच के लिए डॉक्टर यूरिया ब्रीथ टेस्ट, स्टूल एंटीजन टेस्ट या जरूरत पड़ने पर एंडोस्कोपी के दौरान जांच कर सकते हैं। संक्रमण की पुष्टि होने पर डॉक्टर की सलाह से एंटीबायोटिक और एसिड कम करने वाली दवाओं से इसका इलाज किया जाता है। IARC ने गैस्ट्रिक कैंसर की रोकथाम के लिए H. pylori की जांच और उपचार को लेकर स्क्रीन-एंड-ट्रीट रणनीतियों पर भी मार्गदर्शन जारी किया है।
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