सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मोबाइल और कंप्यूटर की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से बचाव के नाम पर ब्लू-कट लेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। हालांकि, विशेषज्ञ के अनुसार इन लेंसों को आंखों के लिए बेहद फायदेमंद बताने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। सर गंगाराम अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. इकेडा लाल के मुताबिक, ऐसी पुख्ता रिसर्च नहीं है जो यह साबित करे कि ब्लू-कट लेंस आंखों में सूखापन, जलन, दर्द या स्क्रीन से होने वाली थकान को खास तौर पर कम करते हैं।
विशेषज्ञ के अनुसार, सामान्य स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से रेटिना को नुकसान होने का प्रमाण भी नहीं है। लंबे समय तक स्क्रीन देखने पर आंखों में थकान का एक बड़ा कारण कम पलक झपकाना हो सकता है। इससे आंखों की सतह की नमी कम होती है और सूखापन या जलन महसूस हो सकती है। लगातार एक ही दूरी पर स्क्रीन देखने और पर्याप्त ब्रेक न लेने से भी आंखों पर तनाव बढ़ सकता है।
अगर चश्मे की जरूरत है तो सही नंबर का चश्मा पहनना अधिक महत्वपूर्ण है। आंखों की थकान कम करने के लिए 20-20-20 नियम अपनाया जा सकता है—हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए करीब 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें। नियमित ब्रेक लें और स्क्रीन देखते समय पर्याप्त पलकें झपकाएं। कोक्रेन की समीक्षा में भी ब्लू-लाइट फिल्टर वाले लेंस और सामान्य लेंस के बीच आंखों की थकान में स्पष्ट अंतर के सीमित प्रमाण मिले हैं।
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