सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : दूषित भोजन या पानी के कारण होने वाली फूड पॉइजनिंग में पेट दर्द और ऐंठन के साथ दस्त, उल्टी, मतली और बुखार जैसी समस्या हो सकती है। लक्षण किस तरह के होंगे, यह संक्रमण फैलाने वाले कीटाणु पर निर्भर करता है।पेट दर्द और दस्त होने पर सबसे जरूरी है शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी न होने देना। थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी, तरल पदार्थ और जरूरत के अनुसार ओआरएस लेते रहें। दस्त या उल्टी ज्यादा होने पर ओआरएस शरीर से खोए पानी और लवण की भरपाई में मदद करता है।दर्द के लिए अपने मन से दर्द निवारक या एंटीबायोटिक दवा लेना सही नहीं है। फूड पॉइजनिंग के अलग-अलग कारणों में उपचार भी अलग हो सकता है और कई मामलों में बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है। कुछ स्थितियों में दस्त रोकने वाली दवाएं भी उचित नहीं होतीं, खासकर जब तेज बुखार या मल में खून हो।
अगर दस्त तीन दिन से ज्यादा रहें, तेज बुखार हो, लगातार उल्टी के कारण पानी न टिके, मल में खून आए या पेशाब कम होने, मुंह सूखने और चक्कर आने जैसे डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। ध्यान रखें: पेट दर्द का कारण हमेशा फूड पॉइजनिंग नहीं होता। तेज या लगातार दर्द होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
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