आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम), भोपाल और द नेचर कंजर्वेंसी सेंटर इंडिया द्वारा संयुक्त रूप से “नर्मदा घाटी तटवर्ती पुनर्स्थापन: प्रमुख सीख और भविष्य की संभावनाएं” विषय पर एक विशेषज्ञ परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में मुख्य रूप से आईआईएफएम के निदेशक के. रविचंद्रन उपस्थित रहे। साथ ही इसका संचालन द नेचर कंजरवेंसी इंडिया के सुशील सहगल ने किया।
अपने उद्बोधन में, के. रविचंद्रन ने नदी तटीय क्षेत्रों के लिए किए गए उल्लेखनीय पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्निर्माण प्रयासों की सराहना की तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के लिए किये गए कार्यो के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने इस पहल को एक “अद्वितीय दृष्टिकोण” के रूप में वर्णित किया, जिसमें पारिस्थितिकी तंत्र बहाली के लिए एक अधिक समग्र दृष्टिकोण विकसित करके क्षेत्र का मार्गदर्शन करने की इसकी क्षमता पर जोर दिया गया। साथ ही उन्होंने कहा, “आईआईएफएम ऐसे प्रयासों की सराहना करता है। हमारा प्रयास भाग लेने वाली एजेंसियों को ज्ञान एवं जानकारी के आदान-प्रदान के लिए हर संभव रूप में सहायता करना है।”
यह कार्यशाला नर्मदा नदी के तटवर्ती क्षेत्र की बहाली के लिए मूल्यवान चर्चा कर योगदान के संभव विकल्प खोजने पर आधारित रही। द नेचर कंजरवेंसी इंडिया, आईआईएफएम, जन अभियान परिषद, टीईआरआई, जीजीजीआई और एआईजीजीपीए सहित विभिन्न प्रसिद्ध संस्थानों के विशेषज्ञों ने नदी तट बहाली के संबंध में अपने अद्वितीय दृष्टिकोण, अनुभव और परिणामों को साझा करने के लिए कार्यशाला में भाग लिया।
कार्यशाला में सामुदायिक प्रयासों के कारण उत्पन्न पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के भुगतान के लिए एक प्रोत्साहन आधारित तंत्र के विकास पर भी चर्चा हुई, जो इन बहाली प्रयासों को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।