सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा (टीएल) पत्रों की साप्ताहिक समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में कलेक्टर ने विभिन्न विभागों के शासकीय कार्यों की सघन समीक्षा करते हुए जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और अंतर्विभागीय समन्वय को सुदृढ़ करने के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक दायित्वों के निर्वहन में किसी भी स्तर पर उदासीनता अथवा शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी और सभी अधिकारी लोकहित के कार्यों में पूरी संवेदनशीलता के साथ सक्रिय रहें।
आगामी विधानसभा सत्र के दृष्टिगत कलेक्टर मिश्रा ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि विधानसभा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर पूर्णतः सटीक, तथ्यात्मक और समय-सीमा के भीतर प्रेषित किए जाएं, इसमें किसी भी प्रकार का विलंब क्षम्य नहीं होगा। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ करते हुए उन्होंने कहा कि मानसून एवं अन्य आपात स्थितियों के मद्देनजर सभी विभाग आपस में जीवंत समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करें। किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में आपदा प्रबंधन का रिस्पॉन्स टाइम न्यूनतम होना चाहिए और पूर्व निर्धारित सभी सुरक्षात्मक कार्यों का निरंतर फॉलो-अप लिया जाए। जल गंगा संवर्धन अभियान की चर्चा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि अभियान के समापन अवसर पर सभी विभाग गरिमामयी कार्यक्रमों का आयोजन कर उल्लेखनीय कार्यों को प्रमुखता से प्रदर्शित करें तथा इन आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता भी अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाए।
राजस्व कार्यों की समीक्षा के दौरान कलेक्टर मिश्रा ने पटवारियों को 'फॉर्मर रजिस्ट्री' के कार्य को गति देने के लिए साप्ताहिक लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने के निर्देश दिए और सचेत किया कि इस कार्य में अपेक्षित प्रगति न लाने वाले संबंधितों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर लंबित शिकायतों की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को त्वरित और संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। कृषि विभाग को विशेष रूप से निर्देशित किया गया कि वे जिले में उर्वरकों का वितरण अनिवार्य रूप से 'ई-विकास पोर्टल' के माध्यम से ही संपादित करें, जिससे संपूर्ण वितरण व्यवस्था पारदर्शी, नियंत्रित और सुगम बनी रहे।
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों को उनके मूल प्रशासनिक दायित्वों का स्मरण कराते हुए कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्र के 'इंसीडेंट कमांडर' हैं, अतः वे अपनी सभी प्राथमिक जिम्मेदारियों के प्रति अत्यंत सजग रहें। उन्होंने निर्देश दिए कि क्षेत्र के जो भी स्कूल या आंगनवाड़ी भवन जीर्ण-क्षीण या जर्जर अवस्था में हैं, उन्हें अविलंब खाली कराया जाए जिससे बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता न हो। उन्होंने स्थानीय जनसमस्याओं के समाधान हेतु जनप्रतिनिधियों से सतत् समन्वय बनाए रखने तथा क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति के निर्मित होने पर तत्काल धरातल पर मोर्चा संभालते हुए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए कलेक्टर मिश्रा ने नए शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में छात्र नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि करने तथा ड्रॉप-आउट बच्चों की सटीक ट्रैकिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग से समन्वय स्थापित कर ऐसे बच्चों को सूचीबद्ध किया जाए जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं, जिससे उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। अधिकारी स्वयं मैदानी क्षेत्रों का दौरा कर बच्चों की 'अपार आईडी' बनवाना सुनिश्चित करें और केवल अधीनस्थों की बातों पर निर्भर न रहकर स्वयं स्थलीय निरीक्षण द्वारा समस्याओं का व्यावहारिक निराकरण करें। इसके साथ ही, नई शिक्षा नीति के अंतर्गत सह-स्थित आंगनवाड़ियों को' स्कूलों में स्थानांतरित करने हेतु तत्काल सर्वे कार्य पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए।
स्वास्थ्य विभाग के कार्यों को गति देने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देशित किया गया कि वे एनीमिया से पीड़ित महिलाओं की शत-प्रतिशत डाटा प्रविष्टि सुनिश्चित करें तथा 'हाई रिस्क प्रेगनेंसी' वाली महिलाओं का सघन फॉलो-अप लेते हुए जिले के स्वास्थ्य सूचकांकों में सकारात्मक सुधार लाएं। दवाओं की गुणवत्ता और वैधता को परखने के लिए उन्होंने ड्रग इंस्पेक्टर और फूड सेफ्टी ऑफिसर के साथ मिलकर जिले की मेडिकल दुकानों का संयुक्त रूप से सघन निरीक्षण करने के निर्देश दिए, जिससे चिकित्सा क्षेत्र में शुचिता बनी रहे।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर मिश्रा ने ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के सुचारू संचालन पर बल देते हुए कहा कि जिन योजनाओं में जल स्रोत या पाइपलाइन की तकनीकी समस्या है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर तत्काल दुरुस्त किया जाए ताकि नागरिकों को सुगमता से पेयजल उपलब्ध हो सके। अंत में, श्रम विभाग को 'प्रधानमंत्री श्रमयोगी मान-धन योजना' के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र श्रमिकों का पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए। उन्होंने विभाग को एक विस्तृत और समयबद्ध कार्ययोजना बनाकर मिशन मोड में कार्य करने के लिए कहा, जिससे इस कल्याणकारी योजना का वास्तविक लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े हितग्राहियों तक सुगमता से पहुंच सके।
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