सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : कलेक्टर प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय के सभाकक्ष में जिला स्तरीय समीक्षा एवं निगरानी समिति की बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में नगर निगम के अपर आयुक्त (एडिशनल कमिश्नर) तन्मय शर्मा, डिप्टी कलेक्टर निधि चौकसे सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक में मुख्य रूप से वर्षाकाल के दृष्टिगत सुचारू जलापूर्ति, जल की शुद्धता, जनसमस्याओं के त्वरित निवारण और नागरिक सुरक्षा से जुड़े अति-संवेदनशील विषयों पर व्यापक एवं रणनीतिक विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में जलापूर्ति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के नागरिकों को निर्बाध एवं शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। वर्षा ऋतु के आगमन को देखते हुए उन्होंने जल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने की बात कही। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि पारंपरिक जल परीक्षण प्रयोगशालाओं के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लैब्स का भी पूर्ण उपयोग किया जाए ताकि निरंतर और सघन जांच से पानी की शुचिता बनी रहे। इसके साथ ही उन्होंने क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण के लिए मुख्य पेयजल पाइपलाइनों की विस्तृत जानकारी संकलित कर उन्हें जीआईएस प्रणाली पर मानचित्रित करने के निर्देश दिए ताकि किसी भी प्रकार के रिसाव या आकस्मिक समस्या का तत्काल तकनीकी समाधान किया जा सके।

बैठक को संबोधित करते हुए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने जल प्रबंधन की संवेदनशीलता पर बल देते हुए कहा कि "नागरिकों को स्वच्छ और पर्याप्त जल उपलब्ध कराना किसी भी लोक- कल्याणकारी प्रशासन की सबसे मूलभूत प्रतिबद्धता और आधारभूत आवश्यकता है। आगामी वर्षाकाल के दृष्टिगत हमें अत्यधिक सतर्क, सजग और संवेदनशील रहने की आवश्यकता है ताकि किसी भी क्षेत्र में कोई अप्रिय स्थिति निर्मित न हो। जल सुनवाई के माध्यम से प्राप्त होने वाले प्रत्येक आवेदन का पूरी गंभीरता और गुणवत्ता के साथ समयसीमा में निराकरण किया जाए, जिससे आमजन को प्रशासन की कार्यप्रणाली पर अटूट विश्वास बना रहे।"

जल संसाधनों के रचनात्मक विकास और पर्यावरण संरक्षण पर बल देते हुए कलेक्टर मिश्रा ने एक अनूठा दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि जिले के प्रमुख वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स और प्राकृतिक जल स्रोतों को दर्शनीय स्थलों तथा पर्यटन केंद्रों के रूप में भी स्थापित किया जा सकता है, जिससे जनसामान्य में जल संरक्षण के प्रति चेतना जाग्रत होगी। इसके अतिरिक्त, उन्होंने अर्बन चैलेंज फंड के अंतर्गत शोधित जल (ट्रीटेड वॉटर) के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के लिए एक व्यावहारिक और दूरगामी कार्ययोजना तैयार कर उस पर त्वरित गति से कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए ताकि जल की एक-एक बूंद का सदुपयोग हो सके।

नागरिक सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने अग्नि सुरक्षा (फायर सेफ्टी) के मानकों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में निर्देशित किया कि फायर एनओसी जारी करने और उसके कड़ाई से अनुपालन को लेकर प्रशासन 'शून्य सहिष्णुता' (जीरो टॉलरेंस) की नीति पर काम करेगा। उन्होंने जिले के समस्त शैक्षणिक संस्थानों, व्यावसायिक परिसरों और बहुमंजिला आवासीय क्षेत्रों में नियमित रूप से सघन निरीक्षण करने तथा अनिवार्य रूप से फायर एनओसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अग्नि हादसों से बचाव की वास्तविक तैयारियों को परखने के लिए उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में नियमित अंतराल पर प्रभावी ढंग से मॉक ड्रिल्स आयोजित करने की बात भी कही।

नगर निगम अपर आयुक्त तन्मय शर्मा ने एक विस्तृत प्रजेंटेशन के माध्यम से भोपाल शहर में जल की उपलब्धता और उसके वितरण तंत्र की वर्तमान स्थिति की बिंदुवार जानकारी दी। उन्होंने समिति को अवगत कराया कि शहर के विभिन्न वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट्स पूरी क्षमता के साथ सक्रियता से कार्य कर रहे हैं और नगरीय क्षेत्र के सभी प्रमुख जल स्रोतों की वास्तविक स्थिति की निरंतर निगरानी करते हुए सुचारू व निर्बाध जलापूर्ति के पुख्ता प्रबंध सुनिश्चित किए जा रहे हैं।


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