सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जैविक घड़ी के संतुलन से स्वस्थ बचपन और दीर्घायु संभव: प्रो. नरसिंह वर्मा
लखनऊ विश्वविद्यालय के प्राणि विज्ञान विभाग में बुधवार को ‘विश्व सर्केडियन दिवस २०२६’ मनाया गया। कार्यक्रम का आयोजन इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रोनोमेडिसिन, आईएससीएम-एफबीआरएल रिदम सेंटर और न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इस वर्ष दिवस की विषयवस्तु ‘सभी के लिए सर्केडियन स्वास्थ्य: स्वस्थ बचपन से स्वस्थ वृद्धावस्था तक’ रही।
कार्यक्रम का उद्घाटन प्राणि विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. अमिता कनौजिया ने किया। प्रो. शैली मलिक ने अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का स्वागत किया।
मुख्य वक्ता इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रोनोमेडिसिन के महासचिव तथा सरदार पटेल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के प्राचार्य एवं अधिष्ठाता प्रो. नरसिंह वर्मा ने क्रोनोमेडिसिन और स्वस्थ वृद्धावस्था के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी नींद, पाचन, चयापचय, हृदय स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति को प्रभावित करती है।

प्रो. वर्मा ने बताया कि नियमित समय पर सोना-जागना, निर्धारित समय पर भोजन करना और प्राकृतिक प्रकाश के अनुरूप दिनचर्या अपनाना स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। जैविक घड़ी में लगातार असंतुलन होने से नींद संबंधी समस्याओं के साथ चयापचय, हृदय और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का जोखिम बढ़ सकता है। स्वस्थ और दीर्घ जीवन के लिए शरीर की प्राकृतिक लय के अनुरूप जीवनशैली अपनाना जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. शिप्रा भारद्वाज के नेतृत्व में सर्केडियन स्वास्थ्य जांच एवं जागरूकता शिविर भी लगाया गया। शिविर में प्रतिभागियों के रक्तचाप, रक्त शर्करा की दैनिक लय और चयापचय स्वास्थ्य का मूल्यांकन किया गया। विशेषज्ञों ने बेहतर नींद, भोजन के उचित समय और अनुशासित दिनचर्या को लेकर व्यक्तिगत परामर्श भी दिया।
आयोजकों के अनुसार, २४ जून को मनाया जाने वाला विश्व सर्केडियन दिवस वर्ष २०२६ में सोसाइटी फॉर रिसर्च ऑन बायोलॉजिकल रिदम्स द्वारा प्रारंभ किया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को शरीर में चौबीस घंटे चलने वाली जैविक घड़ी तथा स्वास्थ्य पर उसके प्रभावों के प्रति जागरूक करना है।
कार्यक्रम में डॉ. गीतांजलि मिश्रा, डॉ. अलका अग्रवाल, डॉ. मधु गुप्ता और डॉ. अंजली सहित विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य, शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन प्रो. अमित त्रिपाठी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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