सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : डायनासोरों के विलुप्त होने से लेकर ग्रह सुरक्षा तक: आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल ने नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस 2026 मनाने हेतु किया आमंत्रित

क्या भविष्य में कोई क्षुद्रग्रह पुनः पृथ्वी से टकरा सकता है? वैज्ञानिक संभावित खतरनाक अंतरिक्ष शिलाओं की पहचान कैसे करते हैं? वास्तव में डायनासोरों के विलुप्त होने का कारण क्या था?

इन सभी रोचक प्रश्नों के उत्तर आगंतुकों को 30 जून 2026 (मंगलवार) को प्रातः 10:00 बजे से सायं 5:00 बजे तक आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस 2026 के अवसर पर आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल में प्राप्त होंगे।

प्रत्येक वर्ष 30 जून को विश्वभर में मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस वर्ष 1908 में साइबेरिया के तुंगुस्का क्षेत्र में हुई इतिहास की सबसे बड़ी दर्ज क्षुद्रग्रहीय घटना की स्मृति में आयोजित किया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य क्षुद्रग्रहों, ग्रह सुरक्षा तथा भविष्य में संभावित क्षुद्रग्रह प्रभावों से पृथ्वी की सुरक्षा हेतु किए जा रहे वैश्विक वैज्ञानिक प्रयासों के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।

इस वर्ष के आयोजन का मुख्य आकर्षण अंतरिक्ष शिलाएँ और अस्तित्व डायनासोर विलुप्ति से ग्रह सुरक्षा तक विषय पर आधारित विशेष प्रदर्शनी होगी। इस प्रदर्शनी के माध्यम से आगंतुक अरबों वर्ष पूर्व की अंतरिक्ष यात्रा का अनुभव करेंगे और जानेंगे कि किस प्रकार क्षुद्रग्रहों ने हमारे सौरमंडल के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, ग्रहों की उत्पत्ति से जुड़े महत्वपूर्ण संकेत प्रदान किए तथा पृथ्वी पर जीवन के इतिहास को बदल देने वाली घटनाओं—जिनमें डायनासोरों का सामूहिक विलुप्त होना भी शामिल है—को प्रभावित किया। प्रदर्शनी में यह भी प्रदर्शित किया जाएगा कि आज विश्व की प्रमुख अंतरिक्ष एजेंसियाँ संभावित खतरनाक क्षुद्रग्रहों की पहचान, उनकी सतत निगरानी तथा आवश्यकता पड़ने पर उनके मार्ग को परिवर्तित करने के लिए किस प्रकार मिलकर कार्य कर रही हैं।

युवा विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जिज्ञासा विकसित करने के उद्देश्य से कार्यक्रम में अनेक सहभागितापूर्ण गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। कक्षा 7 से 10 के विद्यार्थी "प्रत्यक्ष क्षुद्रग्रह खोज गतिविधि के माध्यम से जान सकेंगे कि खगोलशास्त्री वैज्ञानिक तकनीकों की सहायता से पृथ्वी के निकट स्थित क्षुद्रग्रहों की खोज कैसे करते हैं। वहीं कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए "अपना शानदार क्षुद्रग्रह बनाइए गतिविधि आयोजित की जाएगी। इसके अतिरिक्त "क्रेटर प्रभाव प्रदर्शन में प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से यह दर्शाया जाएगा कि किसी ग्रह अथवा उपग्रह की सतह पर क्षुद्रग्रहों के टकराने से विशाल क्रेटरों का निर्माण किस प्रकार होता है।

विशेष प्रदर्शनी पूरे दिन सभी आयु वर्ग के आगंतुकों के लिए खुली रहेगी। परिवारों, विद्यार्थियों, शिक्षकों, विज्ञान क्लबों, शैक्षणिक संस्थानों तथा अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वाले सभी नागरिकों को आमंत्रित किया जाता है कि वे इस विशेष आयोजन में सहभागिता करें तथा सहभागितापूर्ण प्रदर्शों, आकर्षक प्रदर्शनों और वैज्ञानिक तथ्यों के माध्यम से क्षुद्रग्रहों की रोमांचक दुनिया को निकट से जानें।

हाल के वर्षों में NASA के DART मिशन तथा विश्व की विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियों द्वारा संचालित क्षुद्रग्रह नमूना-वापसी मिशनों के कारण क्षुद्रग्रह अनुसंधान के प्रति वैश्विक रुचि निरंतर बढ़ी है। ऐसे समय में अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस यह समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है कि अंतरिक्ष में दिखाई देने वाली ये छोटी शिलाएँ वैज्ञानिक दृष्टि से इतनी महत्वपूर्ण क्यों हैं तथा किस प्रकार इनके अध्ययन से मानवता अपने अतीत को समझने के साथ-साथ भविष्य को भी सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, विज्ञान प्रेमियों, पर्यटकों एवं आम नागरिकों से इस अनूठे विज्ञान उत्सव में अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता करने का आग्रह करता है।


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