सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय स्टेट बैंक केवल देश की सबसे बड़ी बैंकिंग संस्था ही नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण सामाजिक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। कृषि उद्योग व्यापार स्टार्टअप डिजिटल बैंकिंग तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीकी विकास जैसे क्षेत्रों में देश की प्रगति को गति देने के साथ-साथ बैंक सामाजिक सरोकारों के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन कर रहा है। इसी प्रतिबद्धता के अंतर्गत मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी एक अनूठी पहल की गई है। जहां एक ओर लगातार बढ़ते शहरीकरण के कारण हरित क्षेत्र सिमट रहे हैं वहीं भारतीय स्टेट बैंक भेल तथा एक स्थानीय गैर-सरकारी संगठन के सहयोग से एक ऐसा ऑक्सीजन बैंक विकसित किया गया है, जो पूरे क्षेत्र को स्वच्छ वायु, हरित वातावरण और समृद्ध जैव विविधता प्रदान कर रहा है।
पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं प्राकृतिक पारिस्थितिकी के पुनर्स्थापन की दिशा में भारतीय स्टेट बैंक के सहयोग से भेल भोपाल परिसर स्थित जंबूरी मैदान में विकसित 2.5 एकड़ का मियावाकी जैविक वन आज पूरे प्रदेश में एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है। दिसंबर 2023 में प्रारंभ की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना ने लगभग ढाई वर्षों में एक सघन हरित एवं जीवंत वन का स्वरूप धारण कर लिया है, जिसकी पर्यावरणविदों समाजसेवियों शिक्षाविदों एवं वरिष्ठ नागरिकों द्वारा मुक्त कंठ से सराहना की जा रही है।
इस वन में 110 से अधिक स्थानीय वन्य फलदार पुष्पीय एवं औषधीय वृक्ष एवं पौध प्रजातियों का रोपण किया गया है। विभिन्न प्रजातियों के पौधों एवं वृक्षों के कारण यहां एक समृद्ध एवं संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है, जिसने जैव विविधता को नया जीवन प्रदान किया है। आज यह क्षेत्र प्राकृतिक संपदा हरित आवरण और जैव विविधता का एक सशक्त केंद्र बन चुका है।
वन क्षेत्र में किए गए अवलोकन के दौरान यहां 30 से 40 प्रकार के पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। इनमें कुछ ऐसी प्रजातियां भी शामिल हैं जो शहरी क्षेत्रों में अब दुर्लभ होती जा रही हैं। इसके अतिरिक्त दुर्लभ प्रजातियों की तितलियां मधुमक्खियां एवं अन्य परागणकर्ता जीव भी बड़ी संख्या में यहां देखे जा रहे हैं। यह इस वन की पारिस्थितिक समृद्धि और प्राकृतिक संतुलन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
इस परियोजना को आकार देने में तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक चंद्रशेखर शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व तथा सामाजिक सेवा बैंकिंग विभाग के सहायक महाप्रबंधक अनिल कुमार श्रीवास्तव के सतत प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन में मियावाकी विधि के माध्यम से इस परियोजना का विकास किया गया, जिसमें स्थानीय एवं प्राकृतिक प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व के साथ रोपित कर कम समय में प्राकृतिक वन जैसी संरचना विकसित की जाती है। परिणामस्वरूप मात्र ढाई वर्षों में यह क्षेत्र एक घने, आत्मनिर्भर एवं जैव विविधता से परिपूर्ण वन का स्वरूप ग्रहण कर चुका है।
इस वन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसे पूर्णतः जैविक पद्धति से विकसित किया गया है। पौधों के पोषण हेतु केवल जीवामृत एवं घन जीवामृत का उपयोग किया गया है तथा किसी भी स्तर पर डीएपी यूरिया अथवा अन्य रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग नहीं किया गया। इससे वन का विकास पूरी तरह प्राकृतिक एवं पर्यावरण-अनुकूल तरीके से हुआ है।
इस वन के विकास एवं संरक्षण में पर्यावरणविद् पंकज भारती तथा उनकी टीम का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। उनके निरंतर तकनीकी मार्गदर्शन समर्पण एवं अथक प्रयासों से यह परियोजना आज एक सफल मॉडल के रूप में स्थापित हुई है। उनके कार्यों की सराहना न केवल भोपाल और मध्य प्रदेश में, बल्कि देशभर के अनेक पर्यावरण विशेषज्ञों एवं संस्थाओं द्वारा भी की गई है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनुकरणीय मॉडल बताया है तथा कॉर्पोरेट संस्थानों से ऐसे प्रयासों को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।
भारतीय स्टेट बैंक द्वारा अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के अंतर्गत इस परियोजना को सहयोग प्रदान किया गया। भेल भोपाल के सहयोग तथा एक समर्पित गैर-सरकारी संगठन के तकनीकी मार्गदर्शन एवं सतत संरक्षण प्रयासों से जंबूरी मैदान परिसर में इस अनूठे मियावाकी जैविक वन का सफल विकास संभव हो सका।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह वन केवल वृक्षारोपण का उदाहरण नहीं है बल्कि जैव विविधता संरक्षण जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने कार्बन अवशोषण बढ़ाने तथा शहरी क्षेत्रों में प्राकृतिक आवास विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। वरिष्ठ नागरिकों एवं समाज के विभिन्न वर्गों ने इस परियोजना की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अनुकरणीय प्रयास बताया है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह सघन वन न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार कर रहा है बल्कि पक्षियों तितलियों मधुमक्खियों और अन्य वन्य जीवों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल भी बन गया है। स्थानीय स्तर पर बढ़ी जैव विविधता इस बात का संकेत है कि प्रकृति को यदि अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए तो वह स्वयं को पुनर्जीवित करने की अद्भुत क्षमता रखती है।
यह परियोजना केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारतीय स्टेट बैंक की दूरदर्शी सोच, सामाजिक प्रतिबद्धता और सतत विकास के संकल्प का सशक्त उदाहरण है। प्रदेश में इस प्रकार का मियावाकी आधारित पूर्णतः जैविक एवं जैव विविधता संपन्न वन एक अनूठी पहल के रूप में स्थापित हुआ है। यह वन नई पीढ़ी को प्रकृति संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करने का कार्य कर रहा है। साथ ही यह पक्षियों तितलियों मधुमक्खियों एवं अन्य वन्य जीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराते हुए प्रदूषण को कम करने वायु की गुणवत्ता में सुधार लाने तथा पर्यावरण को शुद्ध एवं संतुलित बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
स्थानीय नागरिकों के बीच यह वन अब भारतीय स्टेट बैंक का ऑक्सीजन बैंक के रूप में पहचान बना चुका है, क्योंकि यह क्षेत्र को स्वच्छ वायु हरित वातावरण और समृद्ध जैव विविधता का स्थायी आधार प्रदान कर रहा है। भारतीय स्टेट बैंक द्वारा किया गया यह प्रयास न केवल हरित भविष्य की दिशा में एक सार्थक कदम है बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरणादायी एवं अनुकरणीय मॉडल भी प्रस्तुत करता है।
मात्र ढाई वर्षों में विकसित यह मियावाकी जैविक वन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि वैज्ञानिक पद्धति सामाजिक सहभागिता और संस्थागत सहयोग का समन्वय हो तो सीमित समय में भी एक साधारण भूमि को समृद्ध जैव विविधता वाले सघन वन में परिवर्तित किया जा सकता है। आज यह वन प्रकृति पर्यावरण और सतत विकास के प्रति भारतीय स्टेट बैंक की प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक बन चुका है तथा समाज को हरित स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य का संदेश दे रहा है।


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