सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मेनोपॉज के बाद क्यों कमजोर होने लगती हैं हड्डियां? जानें कारण और बचाव के तरीके
मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति महिलाओं के जीवन का एक प्राकृतिक चरण है, लेकिन इस दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव हड्डियों की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होने से हड्डियों का घनत्व तेजी से घटने लगता है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों के कमजोर होने की बीमारी और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
एस्ट्रोजन की कमी से बढ़ता है खतरा एस्ट्रोजन हार्मोन हड्डियों को मजबूत बनाए रखने और उनके क्षरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेनोपॉज के बाद इसका स्तर गिरने से हड्डियों के टूटने की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जबकि नई हड्डी बनने की गति इसकी भरपाई नहीं कर पाती। भारतीय मेनोपॉज सोसाइटी के दिशा-निर्देशों के अनुसार, मेनोपॉज के शुरुआती वर्षों में हड्डियों का नुकसान अधिक तेजी से हो सकता है। कैल्शियम और विटामिन डी की कमी, शारीरिक गतिविधियों का अभाव, कम वजन, धूम्रपान और बढ़ती उम्र भी इस जोखिम को बढ़ाते हैं।
हड्डियों को मजबूत रखने के लिए क्या करें? विशेषज्ञों के अनुसार, हड्डियों की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार जरूरी है। दूध, दही, पनीर, रागी, तिल और हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन में शामिल करें। विटामिन डी के लिए सुरक्षित तरीके से धूप लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लें। इसके अलावा, नियमित पैदल चलना, वजन सहन करने वाले व्यायाम और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां हड्डियों के स्वास्थ्य में मदद करती हैं। धूम्रपान से बचना, शराब का सेवन सीमित रखना और गिरने से बचाव के उपाय अपनाना भी महत्वपूर्ण है।
समय पर जांच है जरूरी cऑस्टियोपोरोसिस अक्सर शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं देता। इसलिए मेनोपॉज के बाद महिलाओं को अपनी उम्र और जोखिम कारकों के अनुसार डॉक्टर से बोन डेंसिटी टेस्ट (DXA स्कैन) की जरूरत के बारे में सलाह लेनी चाहिए। यदि पीठ में लगातार दर्द, लंबाई कम होने या मामूली चोट से फ्रैक्चर होने जैसी समस्या हो, तो चिकित्सकीय जांच कराएं। समय पर पहचान और उचित उपचार से हड्डियों को होने वाले नुकसान और फ्रैक्चर के खतरे को कम किया जा सकता है।
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