सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सोते समय बड़बड़ाना यानी नींद में बोलना एक आम समस्या है, जिसका अनुभव बच्चों से लेकर वयस्कों तक को हो सकता है। कई लोग नींद के दौरान अस्पष्ट शब्द बोलते हैं, तो कुछ पूरी बातें करने लगते हैं। आमतौर पर इसे गंभीर समस्या नहीं माना जाता, लेकिन यदि यह बार-बार होने लगे या इसके साथ अन्य लक्षण दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज करना उचित नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, नींद में बोलने की स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में ‘सोमनिलोकी’ (Somniloquy) कहा जाता है। यह नींद के अलग-अलग चरणों में हो सकती है। इसके पीछे तनाव, चिंता, नींद की कमी, अनियमित दिनचर्या, बुखार और अत्यधिक थकान जैसे कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में पारिवारिक इतिहास भी इसकी वजह बन सकता है।
हालांकि, कभी-कभार नींद में बड़बड़ाना आमतौर पर चिंता का विषय नहीं होता, लेकिन यदि व्यक्ति नींद में चिल्लाने लगे, डरकर उठ जाए, हाथ-पैर तेजी से चलाए या नींद के दौरान असामान्य व्यवहार करे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। कुछ परिस्थितियों में यह अन्य नींद संबंधी विकारों के साथ भी दिखाई दे सकता है। इसके अलावा, यदि दिनभर अत्यधिक नींद आती है या रात में बार-बार नींद टूटती है, तो इसकी जांच करानी चाहिए।
बचाव के लिए अपनाएं अच्छी आदतें नींद में बोलने की समस्या कम करने के लिए नियमित समय पर सोना और जागना, पर्याप्त नींद लेना, सोने से पहले तनाव कम करना तथा कैफीन और शराब से परहेज करना मददगार हो सकता है। सोने से पहले मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कम करना भी बेहतर नींद में सहायक है। यदि यह समस्या लगातार बनी रहे, अचानक शुरू हो जाए या अन्य असामान्य लक्षणों के साथ दिखाई दे, तो डॉक्टर से परामर्श लें। सही कारण की पहचान और समय पर जांच से नींद से जुड़ी संभावित समस्याओं का उचित समाधान किया जा सकता है।
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