सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा की आराधना के लिए व्रत रखते हैं। इस दौरान खानपान का तरीका बदल जाता है और कई लोग लंबे समय तक भोजन नहीं करते। ऐसे में डायबिटीज यानी मधुमेह से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। व्रत के दौरान भोजन का समय बदलने, कार्बोहाइड्रेट से भरपूर चीजें खाने और दवाओं के नियमित समय में बदलाव होने से ब्लड शुगर लेवल कम या ज्यादा हो सकता है। इसलिए व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

व्रत रखने से पहले डॉक्टर से लें सलाह डायबिटीज के हर मरीज के लिए व्रत रखना सुरक्षित नहीं होता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज को किस प्रकार की डायबिटीज है, उसका ब्लड शुगर कितना नियंत्रित है और वह कौन-सी दवाएं या इंसुलिन ले रहा है। जिन मरीजों का शुगर लेवल अक्सर अनियंत्रित रहता है या जिन्हें पहले गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने की समस्या हो चुकी है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ मरीजों के लिए व्रत न रखना अधिक सुरक्षित हो सकता है।

दवाओं और इंसुलिन का समय खुद न बदलें व्रत के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज अपनी मर्जी से डायबिटीज की दवा बंद न करें और न ही उसकी खुराक घटाएं या बढ़ाएं। लंबे समय तक भूखे रहने पर कुछ दवाओं और इंसुलिन के कारण ब्लड शुगर बहुत कम हो सकता है। वहीं, दवा में जरूरत से ज्यादा बदलाव करने पर शुगर बढ़ने का खतरा भी रहता है। इसलिए डॉक्टर से पहले ही दवा के समय और खुराक के बारे में स्पष्ट सलाह लेनी चाहिए।

साबूदाना और आलू सीमित मात्रा में खाएंनवरात्रि के दौरान साबूदाना, आलू, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजनों का सेवन आम है। हालांकि, इनमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट की मात्रा और उन्हें तैयार करने का तरीका ब्लड शुगर पर असर डाल सकता है। साबूदाना, आलू की तली हुई चीजें और मीठे पेय पदार्थ अधिक मात्रा में लेने से बचें। फल, बिना अतिरिक्त चीनी वाला दही, पनीर, मेवे और अन्य उपवास-अनुकूल पौष्टिक विकल्प संतुलित मात्रा में शामिल किए जा सकते हैं। भोजन का चुनाव अपनी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करें।

नियमित रूप से जांचें ब्लड शुगर व्रत के दौरान ब्लड शुगर की नियमित निगरानी जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच करें और अपने ग्लूकोज स्तर का रिकॉर्ड रखें। यदि कंपकंपी, पसीना आना, चक्कर, तेज भूख, कमजोरी, घबराहट या भ्रम जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इन्हें नजरअंदाज न करें। ये कम ब्लड शुगर के संकेत हो सकते हैं। अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब आना और असामान्य थकान बढ़े हुए ब्लड शुगर के लक्षण हो सकते हैं।

यदि शुगर बहुत कम या अधिक हो जाए अथवा तबीयत बिगड़ने लगे, तो व्रत जारी रखने के बजाय स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और चिकित्सकीय सलाह लें। गंभीर लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। पानी की कमी न होने दें यदि व्रत के दौरान पानी पीने की अनुमति है, तो पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। तली हुई चीजों, अत्यधिक नमक और मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित रखें। लंबे समय तक खाली पेट रहने और जरूरत से ज्यादा शारीरिक मेहनत करने से बचें। व्रत खोलते समय भी एक साथ बहुत अधिक भोजन करने के बजाय संतुलित मात्रा में खाएं। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी

डायबिटीज के मरीजों के लिए नवरात्रि में उपवास रखने का निर्णय उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर होना चाहिए। सही योजना, नियमित निगरानी और चिकित्सकीय सलाह से जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। धार्मिक आस्था के साथ स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है।


Hashtags: #Health #Bhopal #नवर #एनएन #टवर #आईट #रखत #बदल #समय #नवरतरव