सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बढ़ता AQI दिमाग की सेहत पर भी डालता है असर, स्ट्रोक का खतरा

वायु प्रदूषण का बढ़ता स्तर केवल फेफड़ों और सांस से जुड़ी बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हृदय और मस्तिष्क की सेहत को भी प्रभावित कर सकता है। हवा में मौजूद सूक्ष्म प्रदूषक कणों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्ट्रोक और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खासकर पीएम 2.5 जैसे बेहद छोटे कण स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि ये सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सूजन और रक्त वाहिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। AQI बढ़ने पर शरीर पर क्या पड़ता है असर? वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) हवा में प्रदूषण के स्तर को समझने का एक माध्यम है। AQI खराब होने पर हवा में मौजूद प्रदूषकों का संपर्क स्वास्थ्य के लिए अधिक जोखिम पैदा कर सकता है। वाहन का धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य स्रोत वायु प्रदूषण में योगदान देते हैं। पीएम 2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के साथ फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं। इनके संपर्क से शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव तनाव और रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज में गड़बड़ी हो सकती है। इससे रक्तचाप और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। ये बदलाव स्ट्रोक और दिल के दौरे जैसे गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से जुड़े पाए गए हैं।

दिमाग की रक्त वाहिकाओं पर कैसे पड़ सकता है प्रभाव? स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। रक्त प्रवाह रुकने पर मस्तिष्क की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती और वे क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। वायु प्रदूषण के लंबे समय तक संपर्क को स्ट्रोक के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। प्रदूषण रक्त वाहिकाओं में सूजन, रक्तचाप बढ़ने और रक्त के थक्के बनने की प्रवृत्ति को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि AQI बढ़ने से हर व्यक्ति की दिमाग की नसें सीधे ब्लॉक हो जाती हैं। स्ट्रोक के पीछे उम्र, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी बीमारियां जैसे कई कारक भी जिम्मेदार हो सकते हैं। किन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत? बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों को खराब हवा में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए भी प्रदूषण का संपर्क अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है।

यदि AQI खराब या बहुत खराब श्रेणी में हो, तो बाहर लंबे समय तक व्यायाम करने से बचें। स्थानीय प्रदूषण स्तर की जानकारी लेकर अपनी गतिविधियों की योजना बनाएं। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाला, सही फिटिंग का N95 मास्क इस्तेमाल किया जा सकता है। घर में धुआं पैदा करने वाली गतिविधियों को सीमित करें और संभव हो तो उपयुक्त एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें। स्ट्रोक के लक्षण पहचानना बेहद जरूरी स्ट्रोक के लक्षण अचानक दिखाई दे सकते हैं। इनमें चेहरे का एक तरफ झुकना, एक हाथ या पैर में कमजोरी अथवा सुन्नपन, बोलने में परेशानी, अचानक दृष्टि कमजोर होना, संतुलन बिगड़ना और तेज सिरदर्द शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक होने का इंतजार न करें, क्योंकि स्ट्रोक के इलाज में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है।

प्रदूषण से बचाव के लिए क्या करें? वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए AQI की नियमित जानकारी रखें, खराब हवा के दौरान बाहरी गतिविधियां सीमित करें और घर के अंदर धूल तथा धुएं को कम करने का प्रयास करें। नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और रक्तचाप तथा मधुमेह पर नियंत्रण भी समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष: बढ़ता वायु प्रदूषण केवल सांस की समस्या नहीं है। यह हृदय और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। प्रदूषण से बचाव और स्ट्रोक के शुरुआती संकेतों की पहचान गंभीर जटिलताओं को कम करने में मदद कर सकती है।


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