सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : किडनी में पथरी होना आम समस्या है, लेकिन इसका इलाज हर मरीज में एक जैसा नहीं होता। पथरी मिलने पर सबसे पहले उसकी आकार, संख्या और किडनी या पेशाब की नली में उसकी स्थिति की जांच की जाती है। अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन से पथरी की स्थिति का पता लगाया जा सकता है। छोटी पथरी कई बार बिना ऑपरेशन के पेशाब के रास्ते खुद बाहर निकल सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, दर्द नियंत्रित करने और जरूरत पड़ने पर ऐसी दवा देने की सलाह दे सकते हैं, जो पथरी के बाहर निकलने में मदद करे। हालांकि, जबरदस्ती बहुत अधिक पानी पीना हर स्थिति में सही नहीं है, खासकर अगर पेशाब का रास्ता बंद हो।
अगर पथरी बड़ी है, लगातार तेज दर्द कर रही है, पेशाब का रास्ता रोक रही है, बार-बार संक्रमण हो रहा है या किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है, तो प्रक्रिया या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (SWL), यूरेटेरोस्कोपी और लेजर से पथरी तोड़ना कुछ प्रमुख उपचार हैं। बड़ी किडनी पथरी में PCNL का इस्तेमाल किया जा सकता है।
पथरी दोबारा न बने, इसके लिए पर्याप्त तरल लेना, नमक कम करना और संतुलित आहार रखना महत्वपूर्ण है। लेकिन डाइट में कैल्शियम या ऑक्सलेट को पूरी तरह बंद करने का फैसला खुद न करें। पथरी के प्रकार और पेशाब की जांच के आधार पर डॉक्टर व्यक्तिगत आहार और दवा की सलाह दे सकते हैं। अगर पथरी के साथ बुखार या ठंड लगना, पेशाब बंद होना, लगातार उल्टी या दवा से भी न रुकने वाला तेज दर्द हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। संक्रमण के साथ पेशाब में रुकावट गंभीर स्थिति हो सकती है।
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