आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भोपाल की मोती मस्जिद इलाके में स्थित सुलेमानिया स्कूल को रिनोवेशन के चलते दूसरे स्कूल में शिफ्ट कर दिया गया है। इसे लेकर अभिभावकों में खासी नाराजगी है। इस मामले में स्कूल प्रशासन और अभिभावकों का विवाद इतना बढ़ गया है कि अब पेरेंट्स बच्चों को स्कूल भेजने की बजाय स्कूल की पुरानी बिल्डिंग के दरवाजे पर ही पढ़ाना शुरू कर दिया है।

पेरेंट्स का आरोप है कि रिनोवेशन करने वाली कंपनी की लेबर को ठहराने के लिए जगह देने के चलते शिक्षा विभाग ने बच्चों को एक्सीडेंटल जोन में स्थित स्कूल में शिफ्ट कर दिया है। इसकी शिकायत चुनाव आयुक्त एवं मानव अधिकार आयोग को भी पेरेंट्स ने की है। बता दें कि सुलेमानिया स्कूल नवाबी दौर की बनी हुई बिल्डिंग में है।

इस बारे में एक अभिभावक गजनफर अली ने बताया कि स्कूल दो भागों में बना है। एक भाग पुराना है, तो दूसरा भाग नया है, जो कि साल 2009 में बना था। हाल ही में स्कूल के रिनोवेशन की बात सामने आई। स्कूल के जिस भाग का रिनोवेशन होना है, उस भाग में स्कूल नहीं लगता है, बल्कि यह स्कूल पक्के वाले भाग में लगता है।

14 सितंबर को रिनोवेशन करने वाली कंपनी की लेबर को स्कूल मैनेजमेंट ने बच्चों की क्लास में सोने की परमिशन दी गई। जिसका हमने विरोध किया। फिर 18 सितंबर को स्कूल ने बिना कुछ बताए आदेश जारी कर स्कूल को हमीदिया गर्ल्स स्कूल में शिफ्ट कर दिया।

इसलिए नहीं भेज सकते स्कूल

अभिभावक ने बताया कि फतेहगढ़ स्थित जिस स्कूल में शिफ्ट किया गया है। वाहन तेजी से चलते हैं। सुलेमानिया स्कूल में नर्सरी से 8वीं तक के बच्चे पढ़ते हैं। इसमें अधिकतम बच्चे मजदूरी पेशा लोगों के हैं। छोटे बच्चों का उस सड़क पर जाना खतरनाक है, इसलिए नहीं भेज सकते। वहीं, पक्के भाग में अभी भी क्लास लग सकती है। मगर, ठेकेदारों के मजदूरों को सिर्फ सोने की जगह देने के कारण ऐसा किया जा रहा है।

अभिभावकों की मांग

गजनफर अली ने बताया कि स्कूल में पहले भी पुराने (जहां रिनोवेशन होना है) हिस्से में क्लास नहीं लगती थी। पक्के हिस्से में ही क्लास लगती थी। बच्चों को यथावत वहीं रखा जाए। इसका दूसरा दरवज़ा स्कूल की दूसरी तरफ की सड़क पर खुलता है। वहां से बच्चों को आने जाने का रास्ता दिया जाए। इससे जहां रिनोवेशन होना है, वहां बच्चे का आना जाना नहीं हो सकेगा।

6 नवंबर से हैं एग्जाम

अभिभावकों ने बताया कि लगातार बच्चों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। रोजाना बदल बदलकर पेरेंट्स आते हैं। यहां बच्चों को पढ़ाते हैं। स्कूल के दरवाजे पर गंदगी भी बहुत है। मगर, शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का है, इसलिए करीब 30 बच्चे रोजाना यहां पढ़ने आते हैं।

शिक्षा विभाग की मंशा पर सवाल

रिनोवेशन शुरू होने के 5 दिन तब बच्चों को पक्के वाले भाग में क्लास चलीं। मजदूर भी वहीं रह रहे थे। अगर बच्चों की सुरक्षा पर खतरा था, तो पहले से ही क्यों बच्चों को हटाने का निर्णय नहीं लिया गया। विवाद के बाद ही क्यों यह आदेश जारी कर बच्चों को दूसरे स्कूल में शिफ्ट किया गया। इस मामले में वार्ड के पार्षद समर हुजूर ने बताया कि पक्के भाग में पहले से ही क्लास चल रहीं थीं। मगर, अभिभावकों के विवाद के बाद ही बच्चों को शिफ्ट किया गया, ताकि वहां मजदूरों को रहने की जगह दी जा सके। मैंने भी इस मामले की शिकायत संबंधितों से की है।

छात्रों के हित में किया गया शिफ्ट

भारतीय संस्कृति विभाग ने स्कूल के रिनोवेशन काम शुरू किया है। बच्चों को क्षति न हो, इसलिए यहां से बच्चों को हायर सेकेंडरी स्कूल में भेजा है। रही बात मजदूरों को फायदा देने की तो ऐसा कुछ भी नहीं हैं। यह सिर्फ आरोप मात्र है। अगर वह हमें लिखकर दे दें कि बच्चों को कुछ नहीं होगा, तो हम वहां क्लास लगवा सकते हैं। हालांकि हम बच्चों के लिए दूसरे रास्ते भी तलाश रहे हैं। क्योंकि बच्चों की पढ़ाई ही प्राथमिकता है।

– अंजनी कुमार त्रिपाठी, जिला शिक्षा अधिकारी