सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: लंदन में आयोजित किए जा रहे भारत- यूरोप हिंदी महोत्सव में रवींद्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे को साहित्य, संस्कृति ,शिक्षा और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु वातायन अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मान 2023 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें भारत के पूर्व शिक्षा मंत्री रमेश चंद्र पोखरियाल ‘निशंक’, ब्रिटेन के सांसद वीरेंद्र शर्मा, भारतीय दूतावास के समन्वय मंत्री दीपक चौधरी ने ब्रिटेन एवं अनेक देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में प्रदान किया।
इस अवसर पर संतोष चौबे ने कहा कि भारतीय-यूरोपियन हिंदी सम्मलेन हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार प्रसार के लिए एक सरहानीय प्रयास है। मैं वातायन के पूरे समूह एवं चयन समिति के प्रेम और सम्मान के लिए ह्रदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूं। साथ ही मैं कहना चाहूंगा कि हिंदी के प्रचार प्रसार की यात्रा को इसी ऊर्जा से आगे बढ़ाने का प्रयास करता रहूंगा। किया।

इस अवसर पर चौबे जी के संपादन में प्रकाशित पुस्तक ‘समकालीन प्रवासी साहित्य’ का लोकार्पण भी अतिथियों ने किया। जवाहर कर्णावट ने संतोष चौबे की वृहत रचनात्मक उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर सुप्रसिद्ध साहित्यकार अनामिका, उप्साला विश्वविद्यालय के हाइंस वरनर वेसलर तथा रेखा सेठी को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन यूके हिंदी समिति के संस्थापक पद्मेश गुप्त ने किया। इस अवसर पर वातायन की संस्थापक अध्यक्ष दिव्या माथुर, वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष अनिल जोशी एवं ब्रिटेन के अनेक गणमान्य महानुभावों की उपस्थित रही।
संतोष चौबे का बहुआयामी रचनाकर्म

कवि, कथाकार, उपन्यासकार संपादक और अनुवादक संतोष चौबे उन विरल साहित्यकारों में से हैं जो अपने अभिनव रचनात्मक प्रकल्पों और नवाचारों के लिए वैश्विक पहचान रखते हैं। उनके छह कथा संग्रह- ‘हल्के रंग की कमीज’, ‘रेस्त्राँ में दोपहर’, ‘नौ बिन्दुओं का खेल’, ‘बीच प्रेम में गाँधी’, ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ तथा ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’, तीन उपन्यास- ‘राग केदार’, ‘क्या पता कॉमरेड मोहन’ और ‘जलतरंग’, चार कविता संग्रह- ‘कहीं और सच होंगे सपने’, ‘कोना धरती का’,‘’इस अ-कवि समय में’ तथा ‘घर-बाहर’ प्रकाशित और चर्चित हुए हैं।