सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के योग विभाग द्वारा वर्ल्ड फिलॉसफी डे के अवसर पर आयोजित योग कार्यशाला का इस वर्ष मुख्य विषय पर्यावरणीय संकट को रोकने में दर्शन शास्त्र की भूमिका रखा गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में दर्शन शास्त्र की प्रासंगिकता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से किया गया और विभागाध्यक्ष रत्नेश पाण्डेय ने स्वागत उद्बोधन दिया। अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि दर्शन शास्त्र केवल सैद्धांतिक अध्ययन नहीं, बल्कि जीवन जीने की दिशा देने वाला मार्गदर्शक है। यह व्यक्ति को नैतिकता, जिम्मेदारी और संतुलन की ओर प्रेरित करता है तथा प्राकृतिक और सामाजिक पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे दर्शन के सिद्धांतों को अपने दैनिक जीवन में अपनाएं और इनके माध्यम से सकारात्मक व्यवहार और सोच विकसित करें। विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर तिवारी (अखंड आयुर्वेद संस्थान, भोपाल) ने भारतीय दर्शन और आयुर्वेद के संदर्भ में बताया कि प्राचीन ज्ञान परंपरा में प्रकृति को माता माना गया है और संरक्षण हर व्यक्ति का कर्तव्य है। वहीं, प्रोफेसर लालजीत पचोरी (वशिष्ठ योग संस्थान) ने रामायण और महाभारत के उदाहरणों के माध्यम से दर्शन के गूढ़ तत्वों को सरल रूप में समझाया। उन्होंने सत्य, धर्म और नैतिक मूल्यों के व्यावहारिक जीवन में महत्व को स्पष्ट किया। मुख्य वक्ता नरेन्द्र सिंह (बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ) ने पर्यावरणीय संकट को रोकने में दर्शन शास्त्र की भूमिका पर प्रभावशाली व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में मानव की भौतिकवादी सोच, औद्योगीकरण और असीमित उपभोग ने पर्यावरणीय असंतुलन को बढ़ाया है। दर्शन शास्त्र संयम, संतुलन और नैतिक मूल्यों के पालन की शिक्षा देता है, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक हैं। कार्यक्रम का संचालन अखिलेश विश्वकर्मा ने किया। विश्वविद्यालय के प्राध्यापक, शोधार्थी, योग विद्यार्थी और अन्य विभागों के छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में सहभागिता की और चर्चा के माध्यम से ज्ञानवर्धन किया। इस प्रकार कार्यशाला अत्यंत शिक्षाप्रद, संवादात्मक और प्रेरणादायक रही।

 

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