सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मधुरा उदय कुलकर्णी के अनुसार, 12 से 18 वर्ष की आयु में गर्भ संस्कार का पहला पड़ाव शुरू होता है। यह वह महत्वपूर्ण उम्र है जब लड़की का शरीर मानसिक और शारीरिक रूप से विकसित हो रहा होता है और स्वस्थ गर्भधारण के लिए तैयारी की नींव रखी जा सकती है। कुलकर्णी ने बताया कि इस उम्र में सही पोषण, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता और शारीरिक व्यायाम पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। लड़कियों को प्रजनन स्वास्थ्य, संतुलित आहार और हॉर्मोनल बदलावों की जानकारी देना उनकी सेहत और भविष्य में मातृत्व के लिए लाभकारी होता है। गर्भ संस्कार केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य से भी जुड़ा होता है। इस समय माता-पिता और शिक्षकों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सही समय पर उचित जानकारी और देखभाल से किशोरियों में प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति समझ और जिम्मेदारी विकसित होती है। विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि 12 से 18 वर्ष की आयु में गर्भ संस्कार के पहले पड़ाव की जानकारी देने से किशोरियों में अनचाहे स्वास्थ्य जोखिम और भविष्य में जटिलताओं से बचा जा सकता है। इसके अलावा यह कदम समाज में महिला स्वास्थ्य और सशक्तिकरण की दिशा में भी योगदान देता है। कुलकर्णी का मानना है कि जागरूकता, शिक्षा और सही मार्गदर्शन से किशोरियों में स्वास्थ्य और मातृत्व के लिए तैयारियों को मजबूत किया जा सकता है।

 

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