सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्कआईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मुरैना में हैं। पीएम के दौरे से पहले कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ट्वीट कर पीएम मोदी से 3 सवाल पूछने के साथ मुरैना में भाजपा सरकार द्वारा किए गए वादों को भी याद दिलाया है। इस महीने (अप्रैल) में पीएम का ये छठवां एमपी दौरा है।

जयराम रमेश के पीएम मोदी से सवाल

मुरैना में सेना भर्ती को लेकर भाजपा के बड़े-बड़े वादों का क्या हुआ?

मध्य प्रदेश के गांवों में अभी भी पानी और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव क्यों है?

मुरैना भारत की बिजली चोरी की राजधानी क्यों बन गई है?

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा- तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2018 में मुरैना का दौरा किया था। उन्होंने वादा किया था कि एक या दो साल के भीतर वहां एक सैनिक स्कूल स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहानियां सुनाईं कि कैसे, जब भी वह देश भर की सीमा चौकियों पर जाती हैं, तो उन्हें भिंड-मुरैना के सबसे अधिक सैनिक वहां तैनात मिलते हैं। उन्होंने कहा कि सैनिक स्कूल से मुरैना के शिक्षित युवा सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा कर सकेंगे। उसी कार्यक्रम में तत्कालीन ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि वे भिंड-मुरैना क्षेत्र में सेना का स्थानीय भर्ती कार्यालय स्थापित करेंगे।

छह साल बाद, इनमें से कोई भी वादा पूरा नहीं हुआ है। इसके बजाय, अग्निपथ के माध्यम से, मोदी सरकार ने सशस्त्र बलों की पवित्रता और भिंड-मुरैना के हज़ारों महत्वाकांक्षी युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर दिया है। निर्मला सीतारमण के जोशीले वादों का क्या हुआ? उनलोगों ने मध्य प्रदेश के युवाओं के साथ विश्वासघात क्यों किया है?

स्वच्छ भारत मिशन आदिवासी बस्तियों में नाकाम रहा

जयराम रमेश ने लिखा- मोदी सरकार के प्रमुख कार्यक्रमों में से एक स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) ने मध्य प्रदेश के ग्रामीण हिस्सों, विशेष रूप से आदिवासी बस्तियों में नाकाम रहा है। 2020 की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4.5 लाख शौचालय गायब पाए गए, और बजट से 540 करोड़ रुपए सरकारी अधिकारियों द्वारा निकाल लिए गए थे। जबकि जल और स्वच्छता विभाग का दावा है कि जिन 99.6% घरों में शौचालय की सुविधा थी, उनके पास बहते पानी की भी सुविधा थी, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त बिलकुल अलग तस्वीर पेश करती है।

शौचालय बिना सेप्टिक गड्ढों के बनाए गए हैं, और कई गांवों में पानी की कमी शौचालय के नियमित उपयोग में एक बड़ी बाधा रही है। पानी की उपलब्धता में गिरावट आई है। उदाहरण के लिए, शिवपुरी में, लगभग 500 गांव ऐसे हैं जो फरवरी तक ही अपने वर्ष की 50% जल आपूर्ति समाप्त कर देते हैं। क्या स्वच्छ भारत और हर घर जल के बड़े-बड़े वादे भी सिर्फ जुमले थे?