सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बच्चों में ब्लड कैंसर का खतरा, लगातार थकान को न करें नजरअंदाज
बच्चों में लगातार थकान को अक्सर कमजोरी, पढ़ाई के दबाव या नींद की कमी से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, अगर बच्चा लंबे समय तक असामान्य रूप से थका हुआ या कमजोर रहता है और यह समस्या ठीक नहीं हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बचपन में होने वाले रक्त कैंसर, विशेष रूप से तीव्र लसीकाजन्य ल्यूकेमिया, में थकान और कमजोरी प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञ स्रोतों के अनुसार, ल्यूकेमिया में लगातार थकान के साथ त्वचा का पीला पड़ना, बिना वजह चोट या खून आना, बार-बार बुखार या संक्रमण, हड्डियों और जोड़ों में दर्द, सांस लेने में परेशानी, भूख कम लगना और बिना कारण वजन कम होना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गर्दन, बगल या शरीर के अन्य हिस्सों में बिना दर्द वाली गांठ या सूजन भी देखी जा सकती है।
हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह नहीं है कि बच्चे को निश्चित रूप से रक्त कैंसर है। यही लक्षण कई सामान्य बीमारियों में भी हो सकते हैं। लेकिन यदि लक्षण लगातार बने रहें, बढ़ते जाएं या एक साथ कई संकेत दिखाई दें, तो बच्चे को चिकित्सक को दिखाना जरूरी है। चिकित्सक आवश्यकता के अनुसार रक्त की जांच सहित अन्य परीक्षण कराने की सलाह दे सकते हैं। समय पर जांच से बीमारी के कारण का पता लगाने और जरूरत पड़ने पर उपचार शुरू करने में मदद मिल सकती है। इसलिए बच्चों में लंबे समय से बनी थकान, पीलापन, बार-बार संक्रमण या असामान्य रक्तस्राव जैसे संकेतों को केवल सामान्य कमजोरी मानकर टालना उचित नहीं है।
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