सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : रात के समय कमरे या आसपास मौजूद अधिक रोशनी केवल नींद को प्रभावित करने तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि इसका संबंध हृदय स्वास्थ्य से भी सामने आया है। सितंबर 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में रात की रोशनी के अधिक संपर्क और हृदय विफलता सहित कई हृदय संबंधी बीमारियों के बीच संबंध पाया गया है।

अध्ययन में 11 हजार से अधिक लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों का रात में 3 लक्स से अधिक रोशनी के संपर्क में रहना अधिक था, उनमें हृदय की संरचना और कार्यप्रणाली से जुड़े कुछ प्रतिकूल बदलाव देखे गए। ऐसे लोगों में हृदय विफलता का जोखिम बिना रात की रोशनी वाले समूह की तुलना में 29 प्रतिशत अधिक पाया गया। शोध के अनुसार, अधिक रात की रोशनी का संबंध हृदय की मांसपेशियों में संरचनात्मक बदलाव, कार्यक्षमता में कमी और हृदय के अन्य हिस्सों में बदलाव से भी देखा गया। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कम नींद इस संबंध का एक हिस्सा समझा सकती है।

इससे पहले ब्रिटेन के बड़े अध्ययन में भी रात के सबसे अधिक रोशनी वाले स्तर से हृदय विफलता का जोखिम 56 प्रतिशत अधिक पाया गया था। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे अध्ययनों से यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि रात की रोशनी ही हृदय रोगों का सीधा कारण है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोते समय कमरे में अनावश्यक रोशनी कम रखी जाए और पर्याप्त अंधेरा तथा नियमित नींद का वातावरण बनाया जाए। खिड़की से आने वाली तेज बाहरी रोशनी को पर्दों से रोकना भी उपयोगी हो सकता है।


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