सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आईसीएमआर-भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (बीएमएचआरसी) में विज्ञान क्लब द्वारा विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। स्वास्थ्य केंद्र क्रमांक-7 बीएमएचआरसी सराय बीएमएचआरसी बाल उद्यान तथा पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट परिसर में वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान 50 से अधिक पौधे लगाए गए जिनमें मुख्य रूप से पीपल नीम बरगद और गूलर के पौधे शामिल थे। इसके अलावा एक पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रकृति आधारित समाधान विषय पर व्याख्यान आयोजित किया गया। आईसीएमआर—राष्ट्रीय पर्यावरणीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान आईसीएमआर—निरेह के निदेशक डॉ राजनारायण तिवारी कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे।
बीएमएचआरसी के विद्यार्थियों शोधार्थियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए तिवारी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता ह्रास और बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए प्रकृति आधारित समाधानों को व्यापक स्तर पर अपनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केवल वृक्षारोपण पर्याप्त नहीं है, बल्कि स्थानीय जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्रों के अनुरूप संरक्षण एवं पुनर्स्थापन के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने वनों वेटलैंड्स पीटलैंड्स एग्रोफॉरेस्ट्री जल प्रबंधन तथा ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर को जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए प्रभावी साधन बताया।

तिवारी ने कहा कि प्रकृति आधारित समाधान केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जल सुरक्षा खाद्य सुरक्षा आजीविका संवर्धन और मानव स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्रकृति आधारित समाधानों की सफलता की अनिवार्य शर्त बताते हुए कहा कि किसी भी संरक्षण पहल में स्थानीय लोगों के हितों और सहभागिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीएमएचआरसी की प्रभारी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव ने कहा कि पर्यावरणीय संतुलन लगातार प्रभावित हो रहा है जिसके दुष्प्रभाव आज आंधी बाढ़ और भूस्खलन जैसी घटनाओं के रूप में दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि हम आज पर्यावरण को संरक्षित करेंगे तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य प्रदान कर सकेंगे। भविष्य की पीढ़ियां हमसे यह अवश्य पूछेंगी कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हमने समय रहते पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए। श्रीवास्तव ने कहा कि बीएमएचआरसी परिसर का हरित वातावरण शहर के अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है, जिसके कारण यहां का तापमान भी अपेक्षाकृत कम रहता है।

इसके अलावा करोंद स्थित स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों उनके परिजनों तथा कर्मचारियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने वृक्षारोपण को बढ़ावा देने तथा दैनिक जीवन में पर्यावरण अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में प्रकृति की भूमिका
जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में प्रकृति की भूमिका

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