सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के महात्मा गांधी शोध पीठ द्वारा महात्मा गांधी के विचार और दर्शन पर आधारित एक व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस आयोजन में मुख्य वक्ता मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के एकेडमिक समन्वय विभाग के निदेशक उत्तम सिंह चौहान ने अपने विचार व्यक्तकिये। उन्होंने कहा कि आज संयुक्त राष्ट्र संघ के सामने दो प्रमुख समस्याएं हैं |
एक है हिंसा और दूसरा है पर्यावरण प्रदूषण। उन्होंने कहा कि गांधी के समय में हिंसा की समस्या तो थी किंतु पर्यावरण की समस्या उतनी भयावह नहीं थी जितनी कि आज है किंतु फिर भी उनके विचारों में पर्यावरण के प्रति चिंता झलकती है। चौहान ने कहा कि पूरा विश्व आज गांधी को मुक्ति का दार्शनिक के रूप मेंदेखता है। एकमात्र मुक्ति का मार्ग गांधीवादी चिंतन धारा है। उन्होंने कहा कि 1930 में टाइम मैगजीन ने लिखा था कि ईसा मसीह के बाद सबसे अधिक जाना जाने वाला और प्यारा व्यक्ति है तो वह है महात्मा गांधी।
महात्मा गांधी एक व्यक्ति के रूप में एक राजनीतिक दार्शनिक के रूप में और एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में हमें हमे प्रेरित करते हैं। आज पूरा विश्व या मानता है कि गांधी का दर्शन ही विश्व को आगे ले जा सकता है। चौहान ने कहा कि गांधी के वे कार्यक्रम जो अपूर्ण हैं] उन्हें हमें आज पूरा करने की आवश्यकता है। गांधी का कहना था कि हमें अपने चेतना का स्तर बढ़ना चाहिए। गांधी के विचारों ने आधुनिक राजनीतिक चिंतन का पैराडाइम शिफ्ट किया है। गांधी अपने चिंतन में कभी स्वतंत्रता और समानता को केंद्रीय तत्व के रूप में नहीं मानते थे। गांधी ने अपने आश्रमों के द्वारा अपनी दर्शन को व्यावहारिक रूप में उतारा। उन्होंने ने कहा था कि प्रकृति के पास सभी की उधर पूर्ति की क्षमता है किंतु] किसी एक की भी लालसा को पूर्ण करने की क्षमता नहीं है। गांधी जी के दर्शन का आधार था सत्य और अहिंसा।
उन्होंने सत्याग्रह के आधार पर ही ब्रिटिश साम्राज्य का भारत से अंत किया। गांधी का मानना था कि सत्य ही भगवान है। चौहान ने कहा कि गांधी में कुछ तो है जो उनको अलग-अलग विद्वान अलग-अलग दृष्टि से देखते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति एल.पी. झरिया ने कहा कि गांधी जी के सिद्धांतों पर ही हमारा देश चल रहा है। गांधी का ट्रस्टी शिव का सिद्धांत बहुत प्रचलित है। पंचायती राज व्यवस्था गांधी की अवधारणा थी गांधी जी औद्योगीकरण और पूंजीवाद के विरोधी थे। गांधी ऐसे राज्य की कल्पना करते थे जो की नैतिकता पर आधारित हो और ऐसा समाज का निर्माण करना चाहते थे] जो आम सहमति पर आधारित हो।
उनके मुख्य सिद्धांतों में सत्य, अहिंसा, स्वच्छता ग्राम स्वराज और विश्व शांति प्रमुख थे। उन्होंने कहा कि आज हमें गांधी के विचारों से प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का संचालन मध्य प्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय की वरिष्ठ सलाहकार साधना सिंह बिसेन ने किया। धन्यवाद ज्ञापन गांधी शोधपीठ के सहायक प्राध्यापक मधुकर इटेवार द्वारा किया गया।