आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल/इंदौर: सिलिकॉन सिटी में रविवार शाम को लावारिस मिली नवजात बच्ची के मामले में पुलिस अब तक खाली हाथ है। मासूम के सिर, चेहरे और पीठ पर काफी खरोंच के निशान हैं। नवजात को चीटियों ने जकड़ रखा था। समय रहते टॉउनशिप की जागरूक महिलाएं उसे अस्पताल ले गई और पुलिस को सूचना दी। इसके चलते उसे सही समय पर ट्रीटमेंट मिला। फिलहाल उसकी हालत पहले से बेहतर है ।

रविवार शाम करीब 6 बजे सिलिकॉन सिटी के इंडो अपार्टमेंट के सामने के खाली प्लाट में कचरा बीनने वाले युवक को प्लाट में लगी झाड़ियों में कुल हलचल दिखी। पास जाकर देखा तो झाड़ियों में उसने नवजात को देखा, जिसके शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था और उस पर काफी चीटियां रेंग रही थी। वह तुरंत बाहर आया और रहवासियों को सूचना दी। इस पर यहीं रहने वाली सिमरन कटारिया व नेहा गुप्ता व अन्य मौके पर पहुंचे तो वे भी वह दृश्य देख सिहर गए। नवजात के पूरे शरीर पर चीटियां रेंग रही थी। उसे तत्काल झाड़ियों से बाहर लाकर एक टॉवेल में रखा और पुलिस को सूचना दी।

घंटों झाड़ियों में पड़ी रही, लेकिन नहीं निकली आवाज

आश्चर्य इस बात का है जहां नवजात बच्ची मिली वहां दिन में काफी चहल-पहल रहती है। रविवार को अवकाश होने के कारण भी ऐसा ही माहौल था। ऐसे में दिन में बच्ची को यहां लाकर फेंकना संभव नहीं है। संभव है कि उसे तड़के अंधेरे में फेंका गया। चीटियों ने बच्ची की ऐसी स्थिति कर दी थी कि उसकी आवाज तक नहीं निकली। जिसके चलते लोगों को काफी देर बाद पता चला। उक्त स्थान के आसपास कहीं सीसीटीवी कैमरे भी नहीं लगे हैं।

ऑक्सीजन देकर किया स्टेबल

पुलिस को सूचना देने के बाद रहवासी उसे कार से तुरंत यूनिक अस्पताल ले गए। चूंकि उक्त अस्पताल पीडियाट्रिक यूनिट नहीं है, इसलिए वहां से उसे फिर आदित्य नर्सिंग होम ले जाया गया। रहवासी नेहा गुप्ता ने बताया कि हॉस्पिटल में सबसे पहले उसके पूरी शरीर से चीटियां हटाई गई। इस दौरान उसके सिर, चेहरे और पीठ पर झाड़ियों से खरोच भी आ गई थी। यहां सबसे पहले डॉक्टरों ने हिला-डुला कर उसे रुलाया। इसके बाद ऑक्सीजन देकर पल्स चेक की गई। इस बीच राजेंद्र नगर पुलिस अस्पताल पहुंची। जांचकर्ता प्रदीप यादव ने कागजी कार्रवाई के बाद बच्ची को एमटीएच पहुंचाया।

मदर मिल्क बैंक से मिल रही फीडिंग

हॉस्पिटल की गायनिक यूनिट की इंचार्ज डॉ. हेमलता झरवडे ने बताया कि बच्ची अभी SNCU (स्पेशल न्यूबोर्न केयर यूनिट) में एडमिट है। उसका ऑक्सीजन लेवल व पल्स रेट नॉर्मल है। उसके शरीर पर कई छोटी-छोटी खरोंचे हैं। उसे आईवी चढ़ाई गई है तथा जख्मों पर दवा लगाई गई है, ताकि उसे जल्द से जल्द आराम मिले। उसकी कुछ जांच करवाई गई है, जिसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। बच्ची अभी स्टेबल है। हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक यूनिट के इंचार्ज डॉ. सुनील आर्य ने बताया कि बच्ची को मदर मिल्क बैंक से दूध पिलाया जा रहा है। अभी वह फीडिंग ले रही है तथा जल्द ही उसे वार्ड में रेफर किया जाएगा।

सरकारी हॉस्पिटल से पुलिस जुटा रही जानकारी

उधर, मामले में पुलिस को अभी कोई सूत्र नहीं मिला है। दरअसल जिस खाली प्लॉट में बच्ची मिली थी वहा काफी बड़ा है। उसके तीन और मल्टियों का पिछला हिस्सा है। इसके चलते सीसीटीवी कैमरे नहीं है। उक्त टाउनशिप भी काफी बड़ी है। पुलिस का मानना है कि महिला की डिलीवरी आसपास के क्षेत्रों में ही कहीं हुई है। बच्ची को फेंकने में मां के अलावा अन्य भी लिप्त हैं। पुलिस आसपास के सरकारी मैटरनिटी व प्राइवेट हॉस्पिटल में चार दिनों में हुई डिलीवरी की जानकारी जुटा रही है।