सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में खरीफ सम्मेलन-2026 को लेकर एक पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना किसानों की आजीविका को बेहतर बनाना और देशवासियों को पोषण युक्त आहार उपलब्ध कराना केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। नई दिल्ली के नॉस्क कॉम्प्लेक्स पूसा में राष्ट्रीय खरीफ अभियान–2026 पर कृषि सम्मेलन आयोजित किया गया है। जिसमें देशभर के कृषि मंत्री वैज्ञानिक और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो रहे हैं आईसीएआर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि भी इस महत्वपूर्ण मंथन का हिस्सा बने हैं। खरीफ सीजन की तैयारी को लेकर दो दिन तक विस्तार से चर्चा और समीक्षा की जाएगी। हमारा उद्देश्य है कि किसानों को बेहतर योजना, बेहतर तकनीक और बेहतर समर्थन मिले।
खरीफ सम्मेलन में जुटी टीम एग्रीकल्चर
केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारा खरीफ सम्मेलन प्रारंभ हुआ है और आज यहाँ पूरी टीम एग्रीकल्चर मौजूद है। टीम एग्रीकल्चर का मतलब केवल केंद्र सरकार नहीं, बल्कि राज्य सरकारें आईसीएआर के वैज्ञानिक केंद्र और राज्यों के अधिकारी एफपीओ प्रतिनिधि तथा खेती-किसानी के बारे में सोचने वाला पूरा समूह है। उन्होंने कहा कि कृषि राज्य का विषय है और बेहतर परिणाम राज्यों से ही आते हैं जबकि केंद्र सरकार सहयोगी की भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि खरीफ और रबी फसलों की तैयारी बोनी के लिए उपयुक्त बीजों की उपलब्धता और कृषि मिशनों को प्रभावी ढंग से जमीन तक पहुंचाने को लेकर सम्मेलन में व्यापक चर्चा की जा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि सम्मेलन से पहले राज्यों के साथ वर्चुअल बैठकें आयोजित की गई थीं जिनमें विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसी आधार पर राज्य अपनी तैयारियों के साथ सम्मेलन में पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है उन पर गंभीरता से चर्चा कर समाधान निकालना जरूरी है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले यह सम्मेलन केवल एक दिन का होता था लेकिन इतने बड़े देश में एक दिन में पूरी चर्चा संभव नहीं है। इसलिए अब पहले दिन अधिकारी समूहों में बैठकर अलग-अलग राज्यों के साथ विस्तार से विचार-विमर्श करेंगे और दूसरे दिन राज्यों के कृषि मंत्री भी इसमें शामिल होंगे।
हर राज्य की खेती अलग इसलिए रीजनल स्तर पर हो रही चर्चा
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारा देश बहुत बड़ा है इसलिए इस बार केवल नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ एग्रीकल्चर ही नहीं हो रही है बल्कि हमने रीजनल कॉन्फ्रेंसेस भी शुरू की हैं। अब तक जयपुर लखनऊ और भुवनेश्वर में तीन क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं। इसके अलावा दो और सम्मेलन नॉर्थ-ईस्ट और दक्षिण भारत में आयोजित किए जाएंगे जिनकी तारीखें जल्द तय की जाएंगी। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अलग-अलग राज्यों की खेती और जलवायु परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा अधिक व्यवहारिक और प्रभावी साबित होती है। उन्होंने कहा जब छोटे समूहों में राज्यों के साथ चर्चा होती है तो हर राज्य की समस्याओं और जरूरतों पर विस्तार से बात हो पाती है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भविष्य में एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के आधार पर भी क्षेत्रीय सम्मेलनों के आयोजन पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आईसीएआर द्वारा किए गए विभाजन के अनुसार देश को मोटे तौर पर आठ एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में बांटा जा सकता है। हमारा प्रयास है कि पाँच के बजाय इन आठ जोन के आधार पर क्षेत्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएं ताकि कृषि से जुड़ी योजनाएं और रणनीतियां जमीनी स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंच सकें। साथ ही उन्होंने बताया कि खरीफ सम्मेलन से जुड़ा विस्तृत प्रेजेंटेशन भी तैयार किया गया है, जिसमें विभिन्न कृषि विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
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