आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : हम सिक्किम की खूबसूरती को निहारने गए थे लेकिन पहुंचने के दो दिन बाद ही आसमान से आफत बरसना शुरू हो गई। लगातार बारिश की वजह से हम होटल के कमरों में कैद हो गए। बाहर तेज बारिश और आसपास से झरनों का तेज शोर हमें डरा रहा था। तभी खबर आई की बांध टूट गया है। यह सुनकर डर बढ़ने लगा था। 3 अक्टूबर की वह रात हम कभी नहीं भूल सकते, लेकिन 5 दिन बाद भारतीय सेना ने हमें एयर लिफ्ट कर वहां से निकाला।
यह कहना है इंदौर से घूमने गए संदीप पोरवाल का। उन्होंने बताया कि 30 सितंबर को इंदौर से 6 युगल जोड़े सिक्किम के लिए रवाना हुए थे। इंदौर से सुबह चेन्नई होते हुए पहले बागडोरा और फिर शाम तक गंगटोक पहुंचे। यहां एक दिन रुकने के बाद अगले दिन 1 अक्टूबर से घूमना शुरू किया। 3 अक्टूबर की रात को लाचेंग पहुंचे। उसी दिन रात एक बजे अचानक बादल फटने से बांध टूट गया। थोड़ी देर बाद खबर आई कि, डैम भी टूट चूका है। तेज बारिश के कारण हम सभी डरे हुए थे।
लाचुंग से निकलने का एक ही पुल था चुंगथाग में। यहां लोहे व सीमेंट से बने यह पुल ध्वस्त हो गए थे। सड़क और फोन कनेक्टिविटी पूरी तरह बंद थी। हमने जैसे-तैसे घबराते हुए रात काटी। वहां से लोगों ने बताया कि पानी उतरने के बाद अगले दिन बिजली आई। अगले दिन सिर्फ 7 से 8 घंटे के लिए बिजली आई। इस दौरान पूरे लाचुंग में अफरा-तफरी मची हुई थी। सभी ने लाचुंग के आर्मी कैंप में संपर्क किया।
इस दौरान वहां करीब 1200 लोग थे जिनमें देशी-विदेशी पर्यटक और स्थानीय लोग, कर्मचारी भी शामिल थे। आर्मी कैंप से सभी ने अपने टेलीफोन से घरवालों को सूचना दी। सेना गंगटोक से लाइन लेकर एक-एक व्यक्ति को 15 सेकेंड बात करने के लिए फोन उपलब्ध करवा रही थी। हर बार कनेक्शन लेने में 15 मिनिट का समय लग रहा था।
इस तरह 6 घंटे में एक-एक व्यक्ति बात कर पा रहा था। ऐसे में सेना ने दो लाइन से बढ़ाकर 5 टेलीफोन लाइन कर दी। सभी होटलों और सेना के अधिकारियों ने प्रभावित लोगों रूकने-खाने की व्यवस्था होटल में ही करवाई। 3 से 9 अक्टूबर की दोपहर तक हम होटल में फंसे रहे। हमारे साथ 6 में से 2 जोड़े सीनियर सिटीजन हैं।
यात्रियों की सूची
हीरालाल 67 – अमिता 60 बाफना निवासी कंचनबाग साउथ तुकोगंज
दिलीपभाई 63 – दिव्या शाह 61 निवासी साईनाथ कॉलोनी
जितेंद्र 57 – किरण नागावत 55 निवासी लक्ष्य विहार कनाड़िया रोड
संदीप 52 – शिल्पा पोरवाल निवासी 48, तिलक नगर
कमलेश 56 – लता बागरेचा 50 निवासी नवनीत टॉवर
मुकेश 57 – संगीता 53 गेलड़ा निवासी रतलाम
आज पहुंचेंगे इंदौर
भाई संजय पोरवाल ने बताया कि सेना की मदद से इंदौर से गए सभी यात्रियों से हमारी बात हुई। उन्हें सोमवार को गंगटोक पहुंचाया गया। वहीं से वे मंगलवार को सड़क मार्ग से सिलिगुड़ी पहुंचे। शाम को ट्रेन से रवाना होकर बुधवार सुबह कलकत्ता और वहां से शाम को इंदौर पहुंचेंगे। यहां एयरपोर्ट पर सभी यात्रियों का स्वागत किया जाएगा।
सेना ने दिया मेहमान-सा सम्मान
पोरवाल ने बताया कि सेना के राहत कैंप सूची में 1200 लोग थे। इनमें ज्यादातर को एयरलिफ्ट किया गया। मौसम खराब होने की वजह से 5-5 सीटर हेलिकॉप्टर से लोगों काे ले जाने की कोशिश की। इसमें वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता देते हुए सूची बनाई। कैंप में सभी को मुफ्त भोजन दिया। सभी को अतिथि की तरह रखा। हर दिन कैंप में नंबर लगाने जाना पड़ता था। सेना ने हमारे खाना-पानी सहित सभी सुविधाओं का ध्यान रखा।