आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के बेटे और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनिल शास्त्री इंदौर आए। उन्होंने मप्र चुनाव पर कहा कि यहां भाजपा को हार का डर सता रहा है। कैलाश विजयवर्गीय समेत केंद्रीय मंत्रियों और सांसदों को टिकट देना उनकी कमजोरी का संकेत है। एकाध को छोड़कर सभी दिग्गज चुनाव हारेंगे। शास्त्री ने राहुल गांधी के ओबीसी कार्ड, इंडिया एलायंस, लोकसभा का चुनाव लड़ने और राजनीति में नैतिकता सहित तमाम मुद्दों पर बात की। अनिल देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे और AICC के हिंदी विभाग के प्रमुख हैं।
- इस बार के चुनावों को आप किए नजरिए से देखते हैं?
जवाब – पिछली बार कांग्रेस जीती थी तो भाजपा ने खरीद फरोख्त कर उसे गिरा दिया। इस बार फिर से कांग्रेस सरकार बनाने जा रही है। प्रचंड बहुमत से। लोगों में सरकार के तख्तापलट और शिवराजसिंह चौहान के कामों से गुस्सा है। लाडली बहना सिर्फ चुनावी स्टेंट है।
- लाडली बहनाओं को तो कमलनाथ भी 1500 रु. देने का वादा कर रहे हैं, उन्हें क्या कहेंगे?
जवाब – भाजपा सरकार ने लाडली बहना को पैसे पहले क्यों नहीं दिए। कांग्रेस विपक्ष में है तो बताना ही पड़ेगा कि हम क्या-क्या काम करेंगे, क्या-क्या योजनाएं लाएंगे। सिर्फ भाजपा की बुराई करके चुनाव नहीं जीत सके। सवाल इतना ही है कि शिवराज को चुनाव के दो-तीन महीने पहले यह सब याद क्यों आया?
- BJP ने विजयवर्गीय सहित कई दिग्गजों को उतारा है, क्या कहेंगे? कांग्रेस भी क्या बड़े चेहरे उतारेगी?
जवाब – ये संकेत है कि भारतीय जनता पार्टी बुरी तरह से घबरा चुकी है। उन्हें हार सामने दिख रही है। दिग्गज नामों में एकाध को छोड़ सब हारेंगे। कांग्रेस की बात करें तो कमलनाथ चुनाव लड़ेंगे ही। दिग्विजयसिंह नहीं लड़ेंगे, उनके बेटे लड़ेंगे। बाकी सुरेश पचौरी, अरूण यादव जैसे नेताओं का क्या मन है, चाहेंगे तो लड़ सकते हैं।
- भाजपा 136 सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, कांग्रेस एक सूची जारी नहीं कर पाई? 2019 में आप भी एमपी से चुनाव लड़ना चाहते थे?
जवाब – कांग्रेस में प्रक्रिया चल रही है। जो सर्वे होने थे, वो हो गए। उम्मीदवारों की घोषणा बहुत ही शीघ्र कर दी जाएगी। 2019 में भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ने का मन था। अब हाईकमान जैसा तय करे। इंदौर भी मेरे घर सा है, यहां बरसों रहा हूं।
देश के मुद़्दों पर भी दी राय
INDIA एलायंस में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी में प्रदेशों में थोड़ी दिक्कत आएगी। खासकर पंजाब और दिल्ली में। स्थानीय नेताओं में लड़ाई है। लोकसभा चुनाव में तो दोनों को एक-दूसरे का सपोर्ट करना है, उसे वे स्वीकार नहीं पा रहेे। वन सीट, वन कैंडिडेट फॉर्मूले के बिना बीजेपी को हराना संभव नहीं दिखता।
सिर्फ ओबीसी के नाम पर टिकट नहीं दिए जा सकते। जिसमें जीतने की क्षमता होगी पार्टी उसी को टिकट देगी। हर पार्टी सिर्फ जिताऊ उम्मीदवार को ही टिकट देती है।