सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : भारतीय उद्योग परिसंघ, मध्य प्रदेश द्वारा डॉ. सुचित्रा के. एला, वाइस प्रेसिडेंट, भारतीय उद्योग परिसंघ एवं सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक, भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड के साथ एक मेंबर्स मीट का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सिद्धार्थ चतुर्वेदी, चेयरमैन, भारतीय उद्योग परिसंघ मध्य प्रदेश एवं निदेशक, आईसेक्ट लिमिटेड तथा सौरभ सिंह मेहता, वाइस चेयरमैन, भारतीय उद्योग परिसंघ मध्य प्रदेश एवं निदेशक, कृति न्यूट्रिएंट्स प्रा. लि., की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस सत्र में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया और उभरते आर्थिक रूझानों एवं उद्योग से जुड़े महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया।
अपने संबोधन में डॉ. एला ने मध्य प्रदेश को मध्य भारत में एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरते हुए बताया, जो अपनी रणनीतिक स्थिति, विविध आर्थिक संरचना और निवेश अनुकूल नीतियों के कारण संभव हुआ है। उन्होंने बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान (BRAP 2024) में राज्य को प्राप्त टॉप अचीवर दर्जे को इसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने राज्य के नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदमों, स्टार्टअप्स, एमएसएमई आधुनिकीकरण, इंडस्ट्री 4.0 अपनाने तथा आईटी एवं आईटीईएस के विस्तार पर भी प्रकाश डाला, जिसे मजबूत प्रतिभा आधार का सहयोग प्राप्त है।
वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, विशेषकर पश्चिम एशिया संकट के संदर्भ में, डॉ. एला ने भारतीय उद्योग परिसंघ के 12-सूत्रीय उद्योग एजेंडा को प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने उद्योगों से सप्लाई चेन को मजबूत करने, रणनीतिक भंडारण विकसित करने, ऊर्जा संक्रमण को गति देने, तकनीक आधारित समाधान अपनाने तथा एमएसएमई को बेहतर भुगतान व्यवस्था एवं सहयोग के माध्यम से समर्थन देने का आग्रह किया।


उन्होंने उद्योग को सहयोग प्रदान करने हेतु भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा दिए गए प्रमुख नीतिगत सुझावों को भी साझा किया, जिनमें विवाद संबंधित इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम का प्रस्ताव, एमएसएमई एवं निर्यातकों के लिए अस्थायी राहत उपाय, कार्यशील पूंजी की उपलब्धता बढ़ाना, रियायती ऋण सुविधा, तथा जीएसटी रिफंड एवं व्यापारिक देयों के शीघ्र निपटान जैसे कदम शामिल हैं।
भारतीय उद्योग परिसंघ की 130 से अधिक वर्षों की विरासत पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. एला ने इसे एक सशक्त विकासात्मक संस्था बताया, जो उद्योग और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु के रूप में कार्य करते हुए प्रमुख सुधारों को आगे बढ़ाने और अनुकूल व्यावसायिक वातावरण तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान, उद्योग-शिक्षा सहयोग को मजबूत बनाने पर सार्थक चर्चा हुई। स्थानीय इंजीनियरिंग संस्थानों को सैद्धांतिक शिक्षा से आगे बढ़ाकर व्यावहारिक, समस्या समाधान आधारित दृष्टिकोण अपनाने के संदर्भ में डॉ एला ने कहा कि संस्थानों को अग्रणी संस्थानों के साथ साझेदारी कर मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए, साथ ही उद्योगों के साथ मजबूत सहयोग स्थापित करना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि संस्थान अपनी विशेषज्ञता की पहचान कर उसके आधार पर विशेषीकृत क्लस्टर विकसित करें, जिससे उद्योग-उन्मुख और मापनीय परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
इस पहल पर बात करते हुए सीआईआई मध्य प्रदेश के चेयरमैन सिद्धार्थ चतुर्वेदी ने कहा कि इस प्रकार के संवाद मंच उद्योग, शिक्षा और नीति निर्माण के बीच एक सशक्त सेतु का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश तेजी से उभरती औद्योगिक संभावनाओं का केंद्र बन रहा है, और ऐसे संवाद राज्य में नवाचार, निवेश और कौशल आधारित विकास को नई गति प्रदान करेंगे।
इस सत्र में उद्योग जगत के सदस्यों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही और यह संवाद, सहयोग एवं उपयोगी विचारों के आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ।

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