सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : जानवर गंदा पानी कैसे पी लेते हैं, इंसानों से कितना अलग है शरीर?

अक्सर देखा जाता है कि कुत्ते, गाय, भैंस और कई जंगली जानवर ऐसे जलस्रोतों से पानी पी लेते हैं, जिसे देखकर इंसान उसे पीने से बचता है। इससे यह सवाल उठता है कि क्या जानवरों का पाचन तंत्र गंदे पानी को आसानी से पचा लेता है? वैज्ञानिक रूप से ऐसा कहना सही नहीं है। दूषित पानी जानवरों के लिए भी संक्रमण और बीमारी का कारण बन सकता है।

इंसानों के पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मौजूद होता है, जो भोजन पचाने के साथ कई प्रकार के जीवाणुओं को नष्ट करने में मदद करता है। पेट की अंदरूनी परत पर मौजूद श्लेष्मा और अन्य सुरक्षा तंत्र अम्ल से शरीर की रक्षा करते हैं। हालांकि यह व्यवस्था सभी रोगाणुओं और विषैले पदार्थों को खत्म नहीं कर सकती।

कुछ जानवरों की भोजन संबंधी आदतें, आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों की विविधता और लंबे समय से अपने प्राकृतिक वातावरण के अनुसार हुआ जैविक अनुकूलन उन्हें कुछ रोगाणुओं के प्रति अधिक सहनशील बना सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनका शरीर हर प्रकार के दूषित पानी को सुरक्षित बना देता है।

इंसानों के लिए मल से दूषित पानी विशेष रूप से जोखिमपूर्ण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार ऐसे पानी से दस्त, हैजा, पेचिश, टाइफाइड और पोलियो जैसी बीमारियां फैल सकती हैं। इसलिए पानी साफ दिखाई दे रहा हो, तब भी उसकी गुणवत्ता संदिग्ध होने पर उसे बिना उपचार के पीना सुरक्षित नहीं माना जाता।


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