सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज का खतरा तीन गुना बढ़ा सकता है गट माइक्रोबायोम असंतुलन

नई दिल्ली। बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के खतरे को लेकर एक नई रिसर्च में आंतों में मौजूद सूक्ष्मजीवों के विकास और बीमारी के बीच महत्वपूर्ण संबंध सामने आया है। नेचर मेटाबॉलिज्म में प्रकाशित अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों में शुरुआती उम्र में आंतों के सूक्ष्मजीव समुदाय का विकास जल्दी रुक गया, उनमें टाइप-1 डायबिटीज का खतरा लगभग तीन गुना अधिक था।

शोधकर्ताओं ने टेडी अध्ययन के तहत टाइप-1 डायबिटीज के आनुवंशिक रूप से अधिक जोखिम वाले 887 बच्चों के छह वर्ष तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस दौरान 12,151 बार आंतों के सूक्ष्मजीवों से जुड़े आंकड़े लिए गए। शोध में माइक्रोबायोम के विकास के तीन अलग-अलग स्वरूप सामने आए, जिनमें एक ऐसा समूह था जिसमें इसका विकास शुरुआती अवस्था में ही स्थिर हो गया था। इसी समूह में बीमारी का जोखिम लगभग तीन गुना पाया गया। शोधकर्ताओं के अनुसार, सामान्य रूप से विकसित होने वाले माइक्रोबायोम में समय के साथ ऐसे सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं जो विविध आहार और रेशेदार खाद्य पदार्थों को पचाने में मदद करते हैं। वहीं जल्दी स्थिर हो जाने वाले माइक्रोबायोम में दूध की शर्करा के पाचन से जुड़े सूक्ष्मजीव लंबे समय तक अधिक बने रहे और सूक्ष्मजीवों की विविधता अपेक्षाकृत सीमित रही।

रिसर्च में यह भी पाया गया कि बच्चे की आनुवंशिक संरचना माइक्रोबायोम के विकास और टाइप-1 डायबिटीज के बीच संबंध को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, अध्ययन यह साबित नहीं करता कि माइक्रोबायोम में बदलाव अकेले टाइप-1 डायबिटीज का कारण है। शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक और शुरुआती जीवन के पर्यावरणीय कारकों के संयुक्त प्रभाव की ओर भी संकेत किया है।


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