सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : एमसीडी अस्पताल में 83 दिन बाद बच्ची ने जीती जिंदगी की जंग
दिल्ली के स्वामी दयानंद अस्पताल में डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी से जूझ रही करीब 11 वर्षीय बच्ची का सफल इलाज कर उसे नई जिंदगी दी। बच्ची गुइलेन-बैरे सिंड्रोम से पीड़ित थी और करीब 83 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही। इलाज के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के अनुसार, बच्ची को गंभीर कमजोरी के साथ अस्पताल लाया गया था। बीमारी का असर उसकी सांस लेने वाली मांसपेशियों पर भी पड़ा था, जिसके कारण उसे लंबे समय तक वेंटिलेटर और गहन चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़ी। वह करीब 40 दिन वेंटिलेटर आईसीयू में रही, जबकि इसके बाद लगभग 43 दिन उच्च निर्भरता इकाई में उपचार चला।
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ स्वप्रतिरक्षी बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से परिधीय नसों पर हमला करती है। इससे हाथ-पैरों में कमजोरी और सुन्नपन शुरू हो सकता है तथा गंभीर स्थिति में सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है। अस्पताल की चिकित्सकीय टीम ने बच्ची की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी। जरूरत के अनुसार उसे वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और अन्य श्वसन सहायता दी गई। हालत में सुधार होने के बाद धीरे-धीरे उसे वेंटिलेटर से हटाया गया और अंततः वह स्वस्थ होकर घर लौट सकी।
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