सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : HIV की गोली से बेहतर 8 सप्ताह में लगने वाला इंजेक्शन, स्टडी में खुलासा
HIV के इलाज को लेकर एक नई स्टडी में लंबे अंतराल पर दिए जाने वाले इंजेक्शन को लेकर सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के नेतृत्व में हुई LATA स्टडी में पाया गया कि HIV से संक्रमित किशोरों में हर आठ सप्ताह पर दिया जाने वाला कैबोटेग्राविर और रिलपीविरिन इंजेक्शन रोजाना ली जाने वाली एंटीरेट्रोवायरल गोलियों की तुलना में वायरस को दबाए रखने में अधिक प्रभावी रहा।
अध्ययन में 12 से 19 वर्ष की उम्र के 476 किशोरों को शामिल किया गया। एक समूह को हर आठ सप्ताह पर कैबोटेग्राविर और रिलपीविरिन के इंजेक्शन दिए गए, जबकि दूसरे समूह ने रोजाना टेनोफोविर, लैमिवुडिन और डोल्यूटेग्राविर की गोलियां लीं। करीब 96 सप्ताह के फॉलो-अप में इंजेक्शन लेने वाले समूह के सिर्फ 2 प्रतिभागियों (1%) में वायरस दोबारा बढ़ा, जबकि रोजाना गोली लेने वाले समूह में यह संख्या 15 (6%) रही।
स्टडी में शामिल करीब 94% प्रतिभागियों ने बताया कि हर आठ सप्ताह में इंजेक्शन लेना रोजाना दवा लेने की तुलना में आसान लगा। हालांकि, इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या अन्य हल्की प्रतिक्रिया आम रही, जो ज्यादातर कुछ दिनों में ठीक हो गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, किशोरों में रोजाना दवा लेने में भूल, सामाजिक दबाव और HIV से जुड़े कलंक जैसी चुनौतियां हो सकती हैं। लंबे समय तक असर करने वाला उपचार इन समस्याओं को कम करने में मदद कर सकता है। हालांकि, इंजेक्शन या गोली में से कौन-सा उपचार किसी व्यक्ति के लिए उपयुक्त है, इसका निर्णय डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार करते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह स्टडी HIV से संक्रमित किशोरों के उपचार पर आधारित है। HIV से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली PrEP एक अलग चिकित्सा व्यवस्था है और उसके लिए भी लंबे समय तक असर करने वाले इंजेक्शन उपलब्ध हैं।
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