सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ भोपाल: मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में अब अच्छी सैलरी पाने वाले युवाओं के लिए भी अपना घर खरीदना आसान नहीं रह गया है। खासकर नौकरीपेशा युवा और मध्यमवर्गीय परिवार एक छोटे से 1BHK फ्लैट के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। शहर में जमीन की बढ़ती कीमतें, निर्माण लागत और सरकारी शुल्क ने मकानों की कीमतों को इतना बढ़ा दिया है कि नियमित आय वाले लोगों के लिए घर खरीदना बड़ी आर्थिक चुनौती बन गया है।
रियल एस्टेट कारोबारी अभिनंदन लोढ़ा ने हाल ही में एक चर्चा के दौरान कहा कि अच्छी कमाई करने वाले युवा भी मुंबई में अपने कार्यस्थल के आसपास घर खरीदने में सक्षम नहीं हैं। उनका कहना है कि लोग लंबा सफर तय करने के बजाय शहर के नजदीक रहना चाहते हैं, लेकिन जमीन और सरकारी शुल्क की ऊंची लागत के कारण ऐसा करना मुश्किल होता जा रहा है।
लोढ़ा के मुताबिक, 50 से 60 लाख रुपये की कीमत वाले घरों की मांग तो काफी है, लेकिन इस बजट में मकान उपलब्ध कराना डेवलपर्स के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसके लिए सरकार की ओर से विशेष सहयोग और प्रोत्साहन की जरूरत है।
रियल एस्टेट क्षेत्र के आंकड़े भी इस समस्या की ओर संकेत करते हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र में नए आवासीय प्रोजेक्ट्स में किफायती घरों की हिस्सेदारी घट रही है और डेवलपर्स का रुझान बड़े तथा प्रीमियम फ्लैटों की ओर बढ़ा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन की कमी, निर्माण खर्च और विभिन्न सरकारी शुल्क इस बदलाव के प्रमुख कारण हैं।
ऐसे हालात में युवा नौकरीपेशा लोगों के सामने किराये पर रहने, शहर के बाहरी इलाकों में घर तलाशने या घर खरीदने की योजना टालने जैसे विकल्प रह गए हैं।
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