सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल (एम्स, भोपाल) ने आज अपना दूसरा रिसर्च शोकेस कार्यक्रम संस्थान के अटल बिहारी वाजपेयी सभागार में मनाया। यह वार्षिक कार्यक्रम पिछले एक वर्ष में अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में संस्थान द्वारा की गई उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाने के लिए मनाया जाता है।
एम्स, भोपाल के कार्यपालक निदेशक अजय सिंह ने उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य है ‘उपचार के साथ अनुसंधान और साक्ष्य आधारीत चिकित्सा। सिंह ने कहा कि हमारा शोध सिर्फ प्रयोगशाला तक सीमित न हो बल्कि इस शोध के नतीजे मरीजों तक पहुँचे जिससे उनके स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल हो सके। हम अस्पताल से बाहर निकलकर लोगों तक अपनी सेवाएं दे रहे है और केवल एम्स भोपाल ही एकमात्र ऐसा संस्थान है जहाँ एकीकृत स्वास्थ्य क्लीनिक चलाया जा रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर रबीनारायण आचार्य, महानिदेशक, केंद्रीय आयुर्वेद विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस) ने जोर देकर कहा कि आयुर्वेद, दुनिया की सबसे पुरानी उपचार प्रणालियों में से एक है, जो जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आयुर्वेद का शरीर और दिमाग में संतुलन पर ध्यान, व्यक्तिगत उपचार योजनाएं और हर्बल दवाओं का उपयोग आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभावी समाधान प्रदान कर सकता है।
पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों ने शुद्धिकरण प्रक्रियाओं और विषहरण उपचारों के माध्यम से धातु विषाक्तता का पता लगाने और उसका समाधान करने के तरीके स्थापित किए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि एम्स, भोपाल और सीसीआरएएस के बीच सहयोग से विभिन्न बीमारियों और घाव भरने के लिए पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग करके नवीन समाधान निकाले जा सकते हैं।
इरा यूनिवर्सिटी, लखनऊ के कुलपति अब्बास अली मेहदी ने मानव स्वास्थ्य पर पर्यावरण के गहरे प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा की इस कार्यक्रम में अनुसंधानों ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया और विश्वास व्यक्त किया कि अजय सिंह के दूरदर्शी नेतृत्व में ये
अभूतपूर्व अनुसंधान पहल भविष्य में स्वास्थ्य देखभाल में निश्चित रुप से क्रांति लाएगी।
एम्स, भोपाल के अध्यक्ष सुनील मलिक ने अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन बनाने की भारत सरकार की पहल के बारे में बात की ताकि पैसों की कमी के कारण सामाजिक रूप से प्रासंगिक अनुसंधान प्रयासों में कोई रुकावट ना आ सके।
आरजीपीवी के कुलपति सुनील कुमार गुप्ता ने स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और रोगियों के बीच विश्वास को मजबूत करने के लिए बहु-विषयक प्रयासों की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने छात्रों, विशेषकर स्नातक छात्रों को एम्स, भोपाल में उपलब्ध विश्व स्तरीय सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।