आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : प्रदेश में नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के मामलों में पिछले साल भले ही एक प्रतिशत की कमी आई है, लेकिन हकीकत यह है कि भोपाल में बच्चियों से दुष्कर्म के मामले 9.4 प्रतिशत और इंदौर में 33 प्रतिशत तक बढ़े हैं। न्याय के मामले में स्थिति और भी खराब है।

बच्चियों को 35 से 40 प्रतिशत मामलों में ही न्याय मिल पाता है। पिछले 8 महीनों में कोर्ट ने बच्चियों से छेड़छाड़. दुष्कर्म और पॉक्सो के मामलों में 66 आरोपियों को सजा सुनाई, लेकिन 92 आरोपी अलग-अलग कारणों से बरी हो गए।

अभियोजन संचालनालय के आंकड़ों के मुताबिक 2021 में दुष्कर्म और पॉक्सो के 2,500 प्रकरण दर्ज हुए थे। 2022 में इनकी संख्या एक प्रतिशत घटकर 2,476 रही। इस वर्ष 31 जुलाई तक दुष्कर्म और पॉक्सो में 1,561 एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं।

26 जिलों में अपराध बढ़े

प्रदेश के 26 जिलों में बच्चियों से दुष्कर्म के मामले 33 प्रतिशत तक बढ़े हैं। वहीं, 26 जिलों में अपराध का ग्राफ 60 प्रतिशत तक कम हुआ है। भोपाल में वर्ष 2021 में 127 मामले दर्ज हुए थे जो वर्ष 2022 में 139 और इस साल 31 जुलाई तक 82 दर्ज हुए हैं। इस तरह इंदौर में वर्ष 2021 में 123 एफआईआर हुईं थीं, जो वर्ष 2022 में बढ़कर 164 हो गईं। इस साल 31 जुलाई तक 85 मामले दर्ज हो चुके हैं।

भोपाल में दो, बैरसिया में एक पाॅक्सो कोर्ट, सबमें केस लंबित

पाॅक्सो की भोपाल जिला अदालत में दो स्पेशल कोर्ट हैं। 31 अगस्त 2023 की स्थिति में विशेष न्यायाधीश तृप्ति पांडे की कोर्ट में 412, विशेष न्यायाधीश रश्मि मिश्रा की कोर्ट में 546 और बैरसिया में विशेष न्यायाधीश आशीर्वाद भिलाला की कोर्ट में 50 मामले पेंडिंग हैं। यह मामले 2020 से अब तक के हैं।

इस साल अगस्त तक 66 को सजा, 92 आरोपी बरी हुए

जनवरी से लेकर 31 अगस्त तक कोर्ट में पुलिस ने कुल 231 चालान पेश किए। कोर्ट ने 168 प्रकरणों का निराकरण किया, जिसमें 66 आरोपियों को सजा सुनाई गई। 92 आरोपी अलग-अलग कारणों से बरी हो गए।

2012 में बना पॉक्साे अधिनियम

बच्चियों के साथ हो रहे अपराधों में सजा दिलाने के लिए 2012 में पॉक्सो अधिनियम बना। नाबालिग बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों की सुनवाई विशेष अदालत में होने लगीं। इससे पहले बच्चियों के साथ दुष्कर्म, छेड़छाड़ और अन्य अपराधों की सुनवाई एडीजे कोर्ट में होती थी। इससे न्याय में समय लगता था। 25% मामलों में ही सजा हो पाती थी।

फैसला आने में ढाई साल का समय

जानकार कहते हैं कि पॉक्सो की सुनवाई पूरी होने और फैसला आने में दो से ढाई साल लग जाते हैं। डीएनए रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट एवं अन्य रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करने में समय लगता है। इसके अलावा गवाहों की संख्या अधिक होने से भी सुनवाई में समय बढ़ता है। विशेष कोर्ट में 2015 से पहले से पहले के सभी मामलों का निराकरण हो चुका है।

पॉक्सो मामलों में सजा 42%

डीपीओ राजेंद्र उपाध्याय कहते हैं कि बच्चियों के साथ होने वाले अपराधों में सजा का प्रतिशत 42% तक है। 3 विशेष अदालतों में सुनवाई हो रही है।