आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : मुरैना की नंदिनी अग्रवाल का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे कम उम्र की सीए के रूप में दर्ज हुआ है। रिकाॅर्ड बनाना नंदिनी के परिवार की आदत में शुमार है। इससे पहले 2021 में नंदिनी ने सिर्फ 19 साल की उम्र में सीए फाइनल में ऑल इंडिया में फर्स्ट रैंक लाई थी। वहीं, भाई सचिन ने इसी परीक्षा में 18 वीं रैंक लाया था। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज होने के बाद नंदिनी ने अपने भाई के साथ दैनिक भास्कर से बातचीत की।

नंदिनी की 12वीं तक की स्कूली शिक्षा मुरैना में ही हुई। सीए के फर्स्ट लेवल सीपीटी की तैयारी भी उन्होंने मुरैना में रहकर की थी। पढ़ने में वो इतनी होशियार थीं कि अपने बड़े भाई सचिन अग्रवाल की भी मदद किया करती थीं। स्कूली में टेस्ट देकर दो क्लास प्रमोट हुई थीं।

नंदिनी बताती हैं कि उन्होंने पांचवीं कक्षा में ही तय कर लिया था कि सीए बनना है। हमारी फेमिली में कोई सीए नहीं था। मेरे पिता जी और ग्रैंड पेरेंट्स टैक्स प्रैक्टिशनर हैं। शुरुआत से ही हमारा फील्ड फाइनेंस का रहा है, इसलिए शुरुआत से ही मेरा रुझान इस तरफ था। शुरुआत में मेरी मां ही कोच की भूमिका में रहीं और पापा के साथ मिलकर हम दो भाई-बहनों के दिमाग में जो उन्होंने फीड किया, यह सफलता उसी का नतीजा है। हमने अपनी सारी तैयारी ऑनलाइन ही की थी और बारहवीं तक तो कोई कोचिंग भी नहीं ली।

आपके मेंटर कौन हैं ?

सीए की परीक्षा में 18वीं रैंक लाने वाले सचिन दूसरी से लेकर बारहवीं तक अपनी बहन के साथ ही पढ़े हैं। नंदिनी के प्रमोट होने के बाद दोनों ने एक ही सेक्शन में हमेशा साथ पढ़ाई की। दोनों बेहतरीन दोस्त और एक-दूसरे के मेंटर हैं। सचिन बताते हैं कि वे बचपन में इतने ब्राइट स्टूडेंट नहीं थे, लेकिन उन्हें एकेडमिक्स में बेहतर बनाने में नंदिनी का काफी योगदान रहा।

अपने रैंक्स पर बात करते हुए सचिन बताते हैं कि मुझे हमेशा से ही लगता था कि नंदिनी के मार्क्स मेरे से ज्यादा ही आएंगे। बचपन से ही मेरे बात स्वीकारी है कि नंदिनी हमेशा मुझसे अच्छा परफॉर्म करेगी। सीए की रैंकिंग में कुछ नया नहीं था। ये स्कूल में भी मुझसे बेहतर ही करती आ रही है। मैं पढ़ने में ज्यादा होशियार नहीं था, लेकिन जब ये प्रमोट होकर सेम क्लास में आई तो मुझे इसका बहुत फायदा हुआ। जब ये साथ आई तो मेरे अंदर भी एक कॉम्पिटिशन आया और मुझे महसूस हुआ कि मेरे अंदर भी क्षमता है।

नंदिनी इस पर कहती हैं कि हम दोनों एक-दूसरे के मेंटर हैं। हमने जो कुछ भी बेहतर किया है उसमें अकेले का कुछ भी नहीं है। दोनों में कुछ अच्छी चीजें थीं जिससे एक-दूसरे को बेहतर करने का मोटिवेशन मिलता था। कुछ सब्जेक्ट्स जिसमें ये अच्छा है या कुछ सब्जेक्ट में मैं अच्छी हूं। ऐसे में हम एक दूसरे को हेल्प कर दिया करते थे। ये एक बेस्ट कॉम्बिनेशन था।