आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस/आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : टैगोर विश्व कला एवं संस्कृति केन्द्र भोपाल की पुरस्कृत सांस्कृतिक पत्रिका ‘रंग संवाद’ के विशेषांक का लोकार्पण प्रख्यात शास्त्रीय गायिका संगीत विदुषी आरती अंकलीकर टिकेकर ने भोपाल में आयोजित एक गरिमामाय समारोह में किया। इस अवसर पर रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति- प्रधान सम्पादक संतोष चौबे और सम्पादक विनय उपाध्याय उपस्थित थे।
रंगमंच सहित अन्य ललित कलाओं के साथ जुड़े संवाद, विमर्श तथा परंपरा और आधुनिकता के बीच रचनात्मकता को साझा करती इस पत्रिका का ताज़ा अंक ऋतुओं के साथ जीवन और संस्कृति को कलाओं में देखने की अनोखी दृष्टि देता है। यहाँ बारिश के बादल हैं जो गुरुदेव की चिट्ठियों में कहीं छिपे हुए थे। जब इन चिट्ठियों से लिफ़ाफ़ा सरकता है तो बारिश होती है और प्रकृति राग मांड में गा उठती है। इसी बारिश में एक हंसा अपनी प्यास बुझा अकेला उड़ चला है। यहाँ कुमार गाते-गाते कबीर हो गए हैं। यहाँ उम्मीदों के छंद है। रेडियो के अफ़साने हैं। लौटती आवाज़ें हैं। कहानियाँ सुनाता हुआ एक मिसरा है। किस्सों से भरी एक दास्तान है। बैचेन बहारों के नगमें हैं। एक गाँव की संस्कृति है। एक क़स्बे का रंगायन है। सुरों की यात्राएँ हैं। तालों के पाठ हैं। नाटक है। किरदार हैं। नाटक और किरदारों की परछाई है। राग-विराग है। नई पीढ़ी के सुर है। सरहदों की दूरियाँ मिटाने वाला संगीत है। स्वराज के संत को पत्थरों का प्रणाम है। सावन की सौंधी सरगोशियाँ हैं। इस अंक में रस है, उल्लास है, आनन्द है। कुल मिलाकर ये सफ़हे कहते हैं कि ‘ये ऋतु रुसवे की नाहि’…
इस अंक में अपना लेखकीय उजास लिए रबीन्द्रनाथ ठाकुर (अनुवाद- उत्पल बैनर्जी), वासुदेव मूर्ति (अनुवाद- श्वेताम्बरा), उल्हास तेलंग, सोमदत्त शर्मा, संतोष चौबे, कलापिनी, राजेश गनोदवाले, राजेश कुमार व्यास, अश्विनी कुमार दुबे, अनुलता राज नायर, गोपाल दुबे, पंकज पाठक, स्वरांगी साने, संदीप नाईक, जय नागड़ा, मनोज नायर, राजेन्द्र शर्मा, पंकज पाठक, श्वेताम्बरा, विवेक सावरीकर मृदुल, ब्रज श्रीवास्तव, सोनाली बोस, हिमांशु बाजपेयी, नीलेश द्विवेदी, वीनस तरकसवार, उज्वला जोशी उपस्थित हैं।
अग्रणी लेखकों और नई पीढ़ी के रचनाकारों के आलेख, साक्षात्कार तथा रिपोतार्ज शामिल हैं। इस अंक का आवरण सजाया है वन्दना श्रीवास्तव ने। भीतर के पन्नों पर निलेश जाधव, विष्णु चिंचालकर रूद्रनारायण मित्रा और रामगोपाल विजयवर्गीय के रेखांकन हैं। उल्लेखनीय है कि ‘रंग संवाद’ को फेडरेशन ऑफ़ इंडियन पब्लिशर्स, दिल्ली द्वारा लगातार दूसरी बार श्रेष्ठ प्रकाशन पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।