आंचलिक विज्ञान केन्द्र भोपाल में शून्य छाया दिवस मनाया गया
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल में शून्य छाया दिवस 2026 का आयोजन उत्साह एवं जनसहभागिता के साथ किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, विज्ञान प्रेमियों एवं आम नागरिकों ने सहभागिता कर इस दुर्लभ खगोलीय घटना का प्रत्यक्ष अवलोकन किया तथा इसके पीछे निहित वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझा।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को शून्य छाया दिवस की वैज्ञानिक पृष्ठभूमि से अवगत कराया गया। विशेषज्ञों द्वारा बताया गया कि वर्ष के कुछ विशेष दिनों में सूर्य आकाश में ऐसी स्थिति (शीर्ष बिंदु) में पहुँच जाता है जब किसी ऊर्ध्वाधर वस्तु की छाया लगभग उसके ठीक नीचे दिखाई देती है अथवा लगभग लुप्त हो जाती है। इस घटना के कारणों को विभिन्न प्रयोगों एवं प्रदर्शनों के माध्यम से सरल एवं रोचक ढंग से समझाया गया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मानव श्रृंखला एवं वृत्ताकार समूह गतिविधियाँ रहीं, जिनमें प्रतिभागियों ने स्वयं खड़े होकर अपनी छायाओं का अवलोकन किया। प्रतिभागियों ने अनुभव किया कि सामान्य दिनों की तुलना में इस दिन उनकी छाया का स्वरूप एवं दिशा पूर्णतः भिन्न दिखाई दे रही थी तथा छाया अत्यंत छोटी होकर लगभग उनके पैरों के नीचे सिमट गई थी। इस प्रत्यक्ष अनुभव ने प्रतिभागियों को सूर्य की स्थिति, पृथ्वी के अक्षीय झुकाव तथा अक्षांश के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने का अवसर प्रदान किया।
कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न वस्तुओं की शून्य छाया का लाइव प्रदर्शन भी किया गया। प्रतिभागियों ने विभिन्न ऊर्ध्वाधर वस्तुओं की छाया का अवलोकन कर सामान्य दिनों एवं शून्य छाया दिवस के दौरान बनने वाली छाया के मध्य अंतर को समझा। इस अवसर पर सुरक्षित सौर फिल्टरयुक्त दूरबीनों के माध्यम से सूर्य एवं सूर्य धब्बों का विशेष अवलोकन भी कराया गया। प्रतिभागियों ने सूर्य की सतह पर दिखाई देने वाले सूर्य धब्बों का अवलोकन कर उनके वैज्ञानिक महत्व के विषय में जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने इस अद्वितीय खगोलीय घटना के प्रत्यक्ष अनुभव को अत्यंत रोचक एवं ज्ञानवर्धक बताया। कार्यक्रम का उद्देश्य जनसामान्य में खगोल विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रोत्साहित करना तथा प्रकृति में घटित होने वाली खगोलीय घटनाओं के पीछे निहित वैज्ञानिक सिद्धांतों को अनुभवात्मक रूप में समझाना था।
आंचलिक विज्ञान केन्द्र, भोपाल द्वारा आयोजित ऐसे कार्यक्रम विज्ञान को प्रत्यक्ष अनुभवों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुँचाने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



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