सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल: सुप्रतिष्ठित कथाकार, शिक्षाविद् तथा विचारक स्वर्गीय जगन्नाथ प्रसाद चौबे ‘वनमाली’, के रचनात्मक योगदान और स्मृति को समर्पित संस्थान वनमाली सृजन पीठ, रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं आईसेक्ट पब्लिकेशन के द्वारा तीन दिवसीय राष्ट्रीय वनमाली कथा सम्मान समारोह का भव्य आगाज रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय परिसर में किया गया। इस अवसर पर दस अलग-अलग श्रेणियों में रचनाकारों को वनमाली कथा सम्मानों से अलंकृत किया गया जिसमें ‘वनमाली कथाशीर्ष सम्मान’ से सुप्रसिद्ध लेखिका स्व. उषा किरण खान (पटना) को मरणोपरांत सम्मानित किया गया। उनका पुरस्कार उनकी पौत्री लखिमा शंकर खान और दौहित्री अदिति सिंह ने ग्रहण किया। ‘वनमाली राष्ट्रीय कथा सम्मान’ से वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति (लखनऊ) को सम्मानित किया गया। इसके तहत रचनाकारों को शॉल, श्रीफल, प्रशस्ति पत्र एवं एक-एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर अलंकृत किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिष्ठित साहित्यकार ममता कालिया उपस्थित रहीं। इसके अलावा जापान के हिंदी एवं भारतीय भाषा विद्वान पद्मश्री तोमियो मिजोकामी के आत्मीय सान्निध्य में कार्यक्रम का आयोजन हुआ और अध्यक्षता संतोष चौबे ने की।
इस अवसर पर ‘वनमाली कथा मध्यप्रदेश सम्मान’ वरिष्ठ कथाकार डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी (भोपाल) को, ‘वनमाली युवा कथा सम्मान’ युवा कथाकार आशुतोष (सागर) को, ‘वनमाली कथा आलोचना सम्मान’ आलोचक राकेश बिहारी (प्रयागराज) को, ‘वनमाली कथा पत्रिका सम्मान’ लखनऊ से प्रकाशित चर्चित पत्रिका ‘तद्भव’ को प्रदान किए गए। ‘वनमाली प्रवासी भारतीय रचनाकार सम्मान’ वरिष्ठ कथाकार तेजेन्द्र शर्मा (लंदन) को और ‘वनमाली कथेतर सम्मान’ अनिल यादव (दिल्ली) को तथा ‘वनमाली विशिष्ट कथा सम्मान’ सुश्री प्रत्यक्षा (दिल्ली) को प्रदान किया गया। इसके अलावा अरविंद मिश्र को ‘वनमाली विज्ञान कथा सम्मान’ प्रदान किया गया। सभी सम्मानित रचनाकारों को शॉल-श्रीफल प्रशस्ति पत्र एवं 51 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान कर अलंकृत किया गया।
मुख्य अतिथि लेखिका ममता कालिया ने कहा कि वनमाली सृजन पीठ की विश्वसनीयता की वजह से दूर दूर से लोग आ रहे हैं, सात समुंदर पार करके भी लोग आ रहे हैं क्योंकि संतोष चौबे ने इसकी भव्यता को कड़ी मेहनत करके स्थापित किया है और इसे एक अंतरराष्ट्रीय संस्था का स्वरूप दिया है। वनमाली सम्मान प्रतिष्ठित सम्मानों में शामिल है। मेरे घर में कई सम्मान धूल खाते हैं परंतु वनमाली सम्मान को लेकर मैं गर्व से लोगों को बताती हूं।
पद्मश्री तोमियो मिजोकामी ने इस दौरान सम्मानित साहित्यकारों की प्रशंसा की और कहा कि मैं जापानी होने बावजूद हिंदी के सौंदर्य को समझता हूं, साहित्य को समझता हूं। मैंने हिंदी को पढ़ा है और इसकी समृद्धता देख के मन को बहुत संतुष्टता मिलती है।