सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली: आतंकी फंडिंग मामले में बारामूला से सांसद अब्दुल रशीद शेख उर्फ इंजीनियर रशीद की जमानत याचिका का राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने दिल्ली हाईकोर्ट में कड़ा विरोध किया है। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि रशीद ने अभियोजन पक्ष के गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश की है और उन्हें जमानत मिलने पर साक्ष्यों तथा गवाहों पर असर पड़ सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की पीठ के सामने एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि अब तक दर्ज गवाहों के बयानों से संकेत मिलता है कि रशीद ने तीन गवाहों को प्रभावित किया है। एजेंसी ने दावा किया कि इनमें दो संरक्षित गवाह भी शामिल हैं, जो बाद में अपने पहले के बयानों से मुकर गए। एनआईए ने यह भी आरोप लगाया कि रशीद ने भारत विरोधी भाषण दिए और ऐसी गतिविधियों का समर्थन किया।
जांच एजेंसी के अनुसार, रशीद को अपने बीमार पिता से मिलने के लिए अंतरिम जमानत मिली थी, उस दौरान भी उन्होंने कुछ गवाहों से मुलाकात की थी। एनआईए ने दलील दी कि उनके प्रभाव को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं होगा।
वहीं, रशीद के वकील ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि संबंधित अवधि में वह ज्यादातर समय हिरासत में रहे। जिन गवाहों को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है, उनमें एक उनका ड्राइवर और दो निजी सहायक हैं, जो लंबे समय से उनके साथ काम कर रहे हैं। बचाव पक्ष ने उनकी लंबी हिरासत और सांसद होने का हवाला देते हुए जमानत देने की मांग की।
अदालत ने पहले उल्लेख किया था कि रशीद करीब सात वर्षों से हिरासत में हैं और मामले में लगभग 240 गवाह हैं, ऐसे में मुकदमे के पूरा होने में लंबा समय लग सकता है। रशीद 2019 से तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत आतंकी फंडिंग से जुड़े आरोप हैं।
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