सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: दिल्ली प्रदूषण पर BJP-AAP में आरोप-प्रत्यारोप, पराली और AQI डेटा पर विवाद

नई दिल्ली: दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। प्रदूषण के लिए पंजाब में पराली जलाने से लेकर दिल्ली के एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) मॉनिटरिंग स्टेशनों की विश्वसनीयता तक पर सवाल उठाए जा रहे हैं। दोनों दल एक-दूसरे को राजधानी की खराब हवा के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर पराली जलाने की घटनाओं के आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि 26 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 900 से अधिक घटनाएं हुईं। सिरसा ने यह भी आरोप लगाया कि पंजाब में किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बावजूद राज्य सरकार विज्ञापनों के जरिए पराली जलाने की घटनाओं में कमी दिखा रही है। उन्होंने पंजाब पुलिस और सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए, हालांकि ये आरोप हैं।

वहीं, आम आदमी पार्टी ने भाजपा सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की विफलता से ध्यान हटाने के लिए पंजाब के किसानों को निशाना बनाया जा रहा है। आप नेताओं का दावा है कि पंजाब में किसानों के सहयोग से पराली जलाने की घटनाओं में 90 से 95 प्रतिशत तक कमी आई है। पार्टी ने मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भी पराली जलाने की घटनाओं का मुद्दा उठाया है।

विवाद अब दिल्ली के प्रदूषण निगरानी तंत्र तक पहुंच गया है। आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने जहांगीरपुरी स्थित एक AQI मॉनिटरिंग स्टेशन के आसपास पानी छिड़कने का वीडियो साझा कर आरोप लगाया कि इससे प्रदूषण की रीडिंग प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्टेशन के आसपास पानी छिड़कने के उद्देश्य और निगरानी व्यवस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

इस बीच, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार 3 नवंबर को दिल्ली का औसत AQI 350 तक पहुंच गया था, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। प्रतिकूल मौसम और पराली जलाने से उठने वाले धुएं को प्रदूषण बढ़ने के कारकों में शामिल किया गया है।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच दिल्लीवासियों के लिए स्वच्छ हवा की चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रदूषण से निपटने के लिए पराली जलाने के साथ-साथ वाहनों, निर्माण कार्यों और स्थानीय धूल जैसे अन्य स्रोतों पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।


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