सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सरकारी एजेंसियों ने करीब 1,200 कर्मचारियों की तैनाती का दावा किया है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों पर उड़ती धूल, खुले में रखी निर्माण सामग्री और प्रतिबंधों के बीच जारी निर्माण गतिविधियां चिंता बढ़ा रही हैं। निगरानी और कार्रवाई के दावों के बावजूद कई इलाकों में प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन होता नहीं दिख रहा है।
नगर निगम के मुताबिक, उसके 12 जोन में करीब 700 कर्मचारी तैनात हैं, जबकि दिल्ली सरकार की ओर से 500 कर्मचारियों की तैनाती की गई है। संयुक्त प्रवर्तन टीमों ने 2 नवंबर को 914 चालान कर करीब 6.86 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। वहीं, 3 नवंबर को 817 चालान के जरिए लगभग 6.12 लाख रुपये का जुर्माना दर्ज किया गया। इसके बावजूद कई स्थानों पर निर्माण मलबा खुले में पड़ा है और सड़कों पर धूल उड़ रही है। कुछ जगहों पर निर्माण स्थलों पर हरी चादर भी केवल औपचारिकता के तौर पर लगाई गई है।
दिल्ली सरकार की शीतकालीन कार्ययोजना के तहत 1 नवंबर से धूल फैलाने वाली तोड़फोड़ और बाहरी निर्माण गतिविधियों पर रोक लागू है। नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान भी है। इसके बावजूद निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।
बुधवार, 4 नवंबर की सुबह भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के अनुसार दिल्ली का औसत एक्यूआई 369 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में है। मंदिर मार्ग पर एक्यूआई 508 तक पहुंच गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है। ऐसे हालात में केवल टीमें तैनात करना पर्याप्त नहीं होगा; नियमित निरीक्षण, धूल नियंत्रण और नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
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