सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: जंतर-मंतर प्रदर्शन स्थल से क्यों हटा, सुप्रीम कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने बताई वजह

नई दिल्ली: दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को अधिकृत प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर यह निर्णय लिया गया। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर अब बड़े विरोध प्रदर्शनों के लिए उपयुक्त स्थान नहीं रह गया है।

हलफनामे में सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात जाम, भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन सेवाओं की आवाजाही और महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को प्रमुख कारण बताया गया है। पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर मूल रूप से सार्वजनिक सड़क है और इसे स्थायी प्रदर्शन स्थल घोषित करना जनहित के अनुरूप नहीं है।

पुलिस आयुक्त के मुताबिक, यहां हर साल 1,300 से अधिक प्रदर्शन होते हैं, जबकि स्थल की अनुमानित क्षमता करीब 1,500 लोगों की है। कई बार प्रदर्शनकारियों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक हो जाती है। इससे एंबुलेंस और दमकल वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने के साथ भगदड़ जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा रहता है। संसद और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की निकटता को देखते हुए सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ी हैं।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के आदेश के बाद अचानक नहीं लिया गया। गृह मंत्रालय की समिति का गठन 26 अगस्त को हुआ था और उसकी रिपोर्ट सितंबर में ही मिल गई थी। समिति ने जंतर-मंतर रोड को प्रदर्शन के लिए अनुपयुक्त बताते हुए वैकल्पिक स्थान सुझाए थे।

अब प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी ग्राउंड को निर्धारित किया गया है। पुलिस का तर्क है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे आम नागरिकों की आवाजाही, रोजगार और सार्वजनिक सुविधाओं के अधिकारों के साथ संतुलित करना भी जरूरी है।

मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुलिस का जवाब दाखिल हुआ है। जंतर-मंतर को सूची से हटाने के फैसले की वैधता पर अंतिम न्यायिक निर्णय आना अभी बाकी है।


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