एस्ट्रो-टूरिज्म को बढ़ावा देने प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : आंचलिक विज्ञान केन्द्र भोपाल एवं म.प्र. ईको पर्यटन विकास बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पाँच दिवसीय आकाश अवलोकन एवं दूरबीन प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न ईको-पर्यटन स्थलों जंगल कैंपों एवं पर्यटन गतिविधियों से जुड़े गाइडों प्रकृति व्याख्याताओं तथा पर्यटन कर्मियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को खगोल विज्ञान आकाशीय अवलोकन तथा दूरबीन संचालन के सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक पक्षों से परिचित कराना तथा उन्हें इस प्रकार प्रशिक्षित करना था कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में आगंतुकों एवं पर्यटकों को खगोलीय घटनाओं तथा आकाशीय पिंडों के संबंध में वैज्ञानिक एवं रोचक जानकारी प्रदान कर सकें। यह पहल प्रदेश में एस्ट्रो-टूरिज्म गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आकाशीय निर्देशांक प्रणाली तारामंडलों ग्रहों तारों एवं अन्य प्रमुख खगोलीय पिंडों की पहचान, दूरबीनों के प्रकार उनकी संरचना कार्यप्रणाली, संरेखन संचालन एवं रख-रखाव संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम के प्रत्येक दिवस सुरक्षित सौर फिल्टरयुक्त दूरबीनों की सहायता से सूर्य एवं सूर्य धब्बों का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया गया। प्रतिभागियों ने विभिन्न हस्तगत गतिविधियों के माध्यम से खगोलीय अवधारणाओं को समझा तथा संडायल पिनहोल ग्रहण कैमरा एवं कॉन्स्टेलेशन प्रोजेक्टर का निर्माण एवं परीक्षण कर वैज्ञानिक सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से अनुभव किया। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को दूरबीनों के संयोजन संचालन एवं वास्तविक अवलोकन संबंधी विस्तृत प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत आलोक मांडवगणे संयुक्त सचिव आर्यभट फाउंडेशन भोपाल द्वारा विशेष व्याख्यान दिया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को दूरबीनों की कार्यप्रणाली, उनके पीछे कार्य करने वाले वैज्ञानिक सिद्धांतों तथा आकाश में दिखाई देने वाले ग्रहों, तारों एवं नक्षत्रों की पहचान संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की। साथ ही उन्होंने वर्ष के विभिन्न समयों में दिखाई देने वाले प्रमुख खगोलीय पिंडों, उनके अवलोकन की विधियों तथा ब्रह्मांड को समझने में दूरबीनों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
इसी क्रम में प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से समीर धुर्डे वैज्ञानिक अधिकारी इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स पुणे के विशेष व्याख्यान में सहभागिता की। उन्होंने खगोल विज्ञान जनप्रसार आकाशीय पिंडों एवं खगोलीय घटनाओं की व्याख्या तथा इन विषयों को आमजन तक प्रभावी एवं रोचक ढंग से पहुँचाने के विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन प्रदान किया। व्याख्यान के दौरान प्रतिभागियों ने विशेषज्ञ से संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
समापन दिवस पर प्रतिभागियों को प्रशिक्षण पूर्णता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रतिभागियों ने कार्यक्रम को अत्यंत उपयोगी ज्ञानवर्धक एवं व्यावहारिक बताते हुए इसे अपने कार्यक्षेत्र में आगंतुकों एवं पर्यटकों के लिए प्रभावी रूप से उपयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम खगोल विज्ञान विज्ञान संचार एवं पर्यटन के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण रहा। कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित प्रतिभागी अब अपने-अपने ईको-पर्यटन स्थलों पर आगंतुकों को सूर्य ग्रहों तारों तारामंडलों एवं अन्य खगोलीय घटनाओं की वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करने में सक्षम होंगे। इससे न केवल पर्यटकों के अनुभव को समृद्ध बनाने में सहायता मिलेगी, बल्कि प्रदेश में विज्ञान आधारित पर्यटन एवं एस्ट्रो-टूरिज्म गतिविधियों को भी नई दिशा प्राप्त होगी।
आंचलिक विज्ञान केन्द्र भोपाल द्वारा आयोजित इस प्रकार की पहलें विज्ञान के लोकप्रियकरण वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विकास तथा समाज के विभिन्न वर्गों तक विज्ञान को सरल रोचक एवं अनुभवात्मक रूप में पहुँचाने के उद्देश्य को सशक्त बनाती हैं।
इसके अतिरिक्त जीरो शैडो डे पर आंचलिक विज्ञान केंद्र में विभिन्न कार्यक्रम सभी आगंतुकों के लिए आयोजित किये जाएंगे|


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