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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारत की स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक और अगली पीढ़ी के चिप विकास की क्षमताओं का प्रदर्शन किया। नई दिल्ली के भारत मंडपम में 27 से 29 अक्टूबर तक आयोजित इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव (ESTIC) 2026 में डीआरडीओ ने सेमीकंडक्टर और नेक्स्ट-जेनरेशन चिप्स पर विशेष सत्र का नेतृत्व किया। इस सम्मेलन में वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने उभरती तकनीकों तथा भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता पर चर्चा की।
डीआरडीओ के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार प्रणाली महानिदेशक डॉ. बी.के. दास की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम-ऑन-चिप्स, सिलिकॉन एज इंटेलिजेंस और आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर तकनीक के विकास पर विचार किया गया। चर्चा में उद्योगों और स्टार्टअप्स को अगली पीढ़ी के चिप डिजाइन तथा स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित करने में सहयोग देने पर भी जोर दिया गया।
रडार और मिसाइल प्रणालियों के लिए अहम तकनीक प्रदर्शनी में डीआरडीओ की सॉलिड स्टेट फिजिक्स लैबोरेटरी (एसएसपीएल), दिल्ली द्वारा विकसित मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट्स (MMICs) और इन्फ्रारेड फोकल प्लेन एरे (IRFPAs) प्रदर्शित किए गए। गैलियम आर्सेनाइड और गैलियम नाइट्राइड आधारित एमएमआईसी तथा मल्टी-चिप मॉड्यूल का इस्तेमाल कई रणनीतिक अभियानों में किया गया है। ये तकनीकें आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों के महत्वपूर्ण घटक हैं।
वहीं, आईआरएफपीए तकनीक सामरिक मिसाइलों में लक्ष्य की पहचान और उसकी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करती है। इसमें शॉर्ट-वेव, मिड-वेव और लॉन्ग-वेव इन्फ्रारेड तकनीकें शामिल हैं। क्वांटम और भविष्य की तकनीकों का प्रदर्शन डीआरडीओ ने स्क्रैमजेट इंजन तकनीक, न्यूरोमॉर्फिक एक्सेलेरेटर, क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर, फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट और लेजर प्रॉक्सिमिटी सेंसर भी प्रदर्शित किए। संगठन के अनुसार, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में चिप डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और उत्पादन की स्वदेशी क्षमता विकसित करना राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल संप्रभुता और आर्थिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अनुसंधान, उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया गया।
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