सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस | आईटीडीसी न्यूज़, भोपाल :अंकारा। तुर्की की दूसरी सबसे बड़ी झील टुज गोलू (Tuz Gölü) गंभीर जल संकट का सामना कर रही है। मध्य अनातोलिया क्षेत्र में स्थित यह खारे पानी की झील देश के नमक उत्पादन और जैव विविधता, दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। लेकिन कम बारिश, बढ़ते तापमान और खेती के लिए भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण इसका जलस्तर लगातार प्रभावित हो रहा है। गर्मियों में झील का बड़ा हिस्सा लगभग सूख जाता है, जिससे यहां प्रजनन करने वाले फ्लेमिंगो और दूसरे पक्षियों के अस्तित्व पर खतरा बढ़ रहा है। तुर्की के नमक उत्पादन में अहम योगदान टुज गोलू तुर्की की राजधानी अंकारा से करीब 150 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। यह दुनिया की अत्यधिक खारी झीलों में गिनी जाती है और तुर्की के कुल वार्षिक नमक उत्पादन का लगभग दो-तिहाई हिस्सा यहां से मिलता है। झील के किनारों पर जमा नमक को निकालकर प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाया जाता है, जहां से इसे देश और विदेश के बाजारों में भेजा जाता है।
झील का सूखना केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं है। इससे नमक उत्पादन से जुड़े रोजगार, स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन पर भी असर पड़ सकता है। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता और पानी में दिखाई देने वाले प्रतिबिंबों के कारण पर्यटकों को आकर्षित करता है। कम बारिश और भूजल दोहन बड़ी वजह टुज गोलू उथली झील है। कई जगह इसकी गहराई लगभग 50 सेंटीमीटर ही रहती है। गर्मियों में तेज धूप के कारण पानी तेजी से वाष्पित होता है। क्षेत्र में कम वर्षा और झील तक पहुंचने वाले जलस्रोतों में कमी से स्थिति और गंभीर हो जाती है। इसके अलावा, आसपास के कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के लिए लगातार भूजल निकाला जा रहा है। कुछ स्थानों पर बिना अनुमति के कुएं खोदकर पानी निकालने की समस्या भी सामने आई है। इससे झील को पानी उपलब्ध कराने वाले प्राकृतिक स्रोत प्रभावित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सूखे और भूजल के अत्यधिक इस्तेमाल का संयुक्त प्रभाव झील को और कमजोर बना रहा है।
फ्लेमिंगो के प्रजनन स्थल पर खतरा टुज गोलू फ्लेमिंगो के लिए तुर्की के सबसे महत्वपूर्ण प्रजनन स्थलों में से एक है। यहां उथले पानी में उन्हें भोजन मिलता है और अंडे देने के लिए उपयुक्त स्थान उपलब्ध होते हैं। पानी कम होने से भोजन की उपलब्धता, सुरक्षित घोंसले और बच्चों के जीवित रहने की संभावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। वर्ष 2021 में पानी की कमी के दौरान यहां करीब 1,000 फ्लेमिंगो के बच्चों की मौत हुई थी। हाल के वर्षों में भी सूखे के कारण पक्षियों की संख्या और प्रजनन पर असर पड़ने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, वर्ष 2026 में अनुकूल बारिश के बाद फ्लेमिंगो के बच्चों की संख्या में सुधार दर्ज किया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि झील का पारिस्थितिकी तंत्र बारिश और पानी की उपलब्धता में बदलाव के प्रति बेहद संवेदनशील है।
झील को बचाने के लिए क्या जरूरी? विशेषज्ञों के अनुसार, झील को सुरक्षित रखने के लिए भूजल दोहन पर प्रभावी निगरानी, सिंचाई में पानी की बचत और प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण जरूरी है। साथ ही, फ्लेमिंगो के प्रजनन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता और पक्षियों की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी। टुज गोलू का संकट इस बात का संकेत है कि जलवायु परिवर्तन और पानी का अनियंत्रित इस्तेमाल मिलकर प्राकृतिक झीलों, स्थानीय रोजगार और वन्यजीवों को प्रभावित कर सकते हैं। यदि समय रहते जल प्रबंधन में सुधार नहीं हुआ, तो इसका असर तुर्की के नमक उद्योग से लेकर प्रवासी पक्षियों के आवास तक दिखाई दे सकता है।
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