सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस /आईटीडीसी न्यूज़ भोपाल : सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क–आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस | आईटीडीसी न्यूज़, भोपाल :नागकू क्षेत्र में सबसे ज्यादा असर भूकंप का केंद्र चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के उत्तरी हिस्से में नागकू शहर के पास था। यह इलाका ऊंचाई पर स्थित और अपेक्षाकृत कम आबादी वाला है। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, भूकंप के कारण सैकड़ों मकानों को नुकसान पहुंचा और कम से कम 339 घरों के क्षतिग्रस्त या ढहने की सूचना सामने आई। भूकंप के बाद लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। कई स्थानों पर इमारतों में दरारें दिखाई दीं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में निरीक्षण और बचाव कार्य तेज कर दिए हैं। 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित पहुंचाया राहत और बचाव अभियान में पुलिस, अग्निशमन दल और अन्य आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों को लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, 12 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी आश्रय, टेंट, कंबल, गर्म कपड़े और अन्य जरूरी सामान की व्यवस्था की जा रही है।

ऊंचाई वाले क्षेत्र में कम तापमान के कारण राहत कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों में लौटने से पहले सुरक्षा जांच का इंतजार करने की अपील की है। आफ्टरशॉक्स से बढ़ी चिंता चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र के अनुसार, मुख्य भूकंप के बाद 413 झटके दर्ज किए गए। इनमें सबसे तेज आफ्टरशॉक की तीव्रता 4.3 बताई गई। लगातार झटकों के कारण प्रभावित इलाकों में लोगों की चिंता बढ़ी हुई है। भूकंप के कारण कुछ पहाड़ी रास्तों पर चट्टानें गिरने की घटनाएं भी हुईं। राष्ट्रीय राजमार्ग के प्रभावित हिस्सों पर आवाजाही नियंत्रित करनी पड़ी, ताकि बचाव दलों को आने-जाने में परेशानी न हो। अधिकारियों ने क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों पर निगरानी जारी रखी है।

प्रशासन ने राहत कार्य तेज करने के दिए निर्देश चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रभावित लोगों को बचाने, घायलों का इलाज कराने और राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन के सामने चुनौती केवल घायलों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाने की नहीं, बल्कि ठंड और ऊंचाई के बीच विस्थापित परिवारों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने की भी है। फिलहाल बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कर रहे हैं। मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव संभव है, क्योंकि दुर्गम इलाकों में निरीक्षण और राहत अभियान जारी हैं।


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