सीएनएन सेंट्रल न्यूज़ एंड नेटवर्क्स / आईटीडीसी इंडिया ईप्रेस / आईटीडीसी न्यूज़ /एजेंसियाँ/ दिल्ली: नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 के दंगों के दौरान करावल नगर स्थित अल्लाह वाली मस्जिद में तोड़फोड़ और आगजनी के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। पुलिस गवाहों के बयानों में विरोधाभास और सीसीटीवी फुटेज से जुड़े कानूनी दस्तावेजों में खामियां फैसले का प्रमुख आधार बनीं।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने अंकित, सौरभ शर्मा, रोहित, राहुल कुमार और सचिन को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। इन पर आरोप था कि वे दंगों के दौरान करीब 200 लोगों की भीड़ का हिस्सा थे, जिसने करावल नगर की शाहिद भगत सिंह कॉलोनी स्थित मस्जिद में तोड़फोड़ की और आग लगा दी थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस के दो गवाहों के बयानों में गंभीर अंतर पाया। दोनों पुलिसकर्मियों ने दावा किया था कि उन्होंने 25 फरवरी 2020 को सुबह करीब 11 बजे मस्जिद में आगजनी और तोड़फोड़ होते देखी थी। वहीं, मस्जिद के सामने रहने वाले स्वतंत्र गवाह अली अहमद ने बताया कि घटना केवल एक बार हुई थी और उसने इसे 24 फरवरी की रात करीब 8:15 बजे देखा था। उसने दिन में दूसरी घटना होने की बात से इनकार किया था।
अदालत ने पुलिसकर्मियों की उस दिन की गतिविधियों और घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी को लेकर भी विरोधाभास दर्ज किए। इसके अलावा, आरोपियों की पहचान के लिए पेश की गई सीसीटीवी फुटेज वाली डीवीडी और हार्ड डिस्क को भी स्वीकार नहीं किया गया। अदालत के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65बी के तहत आवश्यक वैध प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया था।
इन परिस्थितियों में अदालत ने पांचों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
Hashtags: #DelhiState #Delhi #करावल #नगर #मस्जिद #आगजनी #मामले #पांचों #आरोपी #करावलनगरमस्जिदआगजनी