पहाड़ी और दक्षिणी राज्यों में साफ हवा, दिल्ली में प्रदूषण का संकट क्यों
नई दिल्ली। देश के पहाड़ी राज्यों और दक्षिण भारत के कई शहरों में हवा अपेक्षाकृत साफ बनी हुई है, जबकि दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। हर साल अक्टूबर से सर्दियों तक राजधानी की हवा जहरीली होने लगती है। इसकी वजह केवल वाहनों से निकलने वाला धुआं या पराली जलाना नहीं है, बल्कि दिल्ली की भौगोलिक स्थिति, मौसम और आसपास के क्षेत्रों से आने वाला प्रदूषण भी इसके लिए जिम्मेदार है।
दिल्ली की भौगोलिक स्थिति बनती है बड़ी वजह दिल्ली उत्तर भारत के विशाल इंडो-गंगा मैदान में स्थित है। इसके आसपास घनी आबादी वाले शहर और औद्योगिक क्षेत्र हैं। उत्तर में हिमालय और आसपास के मैदानी इलाकों की भौगोलिक बनावट के कारण सर्दियों में प्रदूषित हवा का फैलाव सीमित हो जाता है। इसके विपरीत, समुद्र के करीब बसे दक्षिण भारत के कई शहरों में समुद्री हवाएं प्रदूषकों को फैलाने में मदद करती हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम औद्योगिक गतिविधियां और बेहतर वायु प्रवाह भी हवा को साफ रखने में सहायक होते हैं।
सर्दियों में हवा में फंस जाते हैं प्रदूषक ठंड के मौसम में तापमान में बदलाव के कारण तापमान प्रतिलोमन यानी टेम्परेचर इनवर्जन की स्थिति बनती है। इसमें जमीन के पास ठंडी हवा और उसके ऊपर गर्म हवा की परत बन जाती है। इससे प्रदूषक ऊपर की ओर नहीं जा पाते और निचली सतह पर जमा होने लगते हैं। कम हवा की गति और वातावरण में ऊर्ध्वाधर मिश्रण की कमी इस समस्या को और गंभीर बना देती है।
पराली और वाहनों का धुआं भी जिम्मेदार दिल्ली के प्रदूषण में स्थानीय और क्षेत्रीय दोनों स्रोतों का योगदान है। वाहनों का धुआं, निर्माण कार्यों से उठने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा और बायोमास जलाना प्रदूषण बढ़ाते हैं। अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा सहित आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है। उत्तर-पश्चिमी हवाएं इस धुएं को दिल्ली तक पहुंचा सकती हैं।
समाधान के लिए पूरे क्षेत्र में प्रयास जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली के प्रदूषण को केवल राजधानी की सीमाओं के भीतर उपाय करके नियंत्रित नहीं किया जा सकता। दिल्ली-NCR और आसपास के राज्यों में वाहनों, उद्योगों, निर्माण गतिविधियों और पराली जलाने पर नियंत्रण के लिए साझा रणनीति जरूरी है। हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए स्थानीय कार्रवाई के साथ क्षेत्रीय स्तर पर लगातार प्रयास करना होगा।
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