मुंबई। महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार के एक फैसले से कोल्हापुर की प्रमुख सहकारी संस्था गोकुल दूध संघ को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज्य मंत्रिमंडल ने 500 करोड़ रुपये से अधिक सालाना कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं के प्रबंधन मंडल में पांच सरकारी नामित सदस्यों की नियुक्ति के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इनमें चार सदस्यों को मतदान का अधिकार मिलेगा, जबकि पांचवां सदस्य सहकार विभाग का अधिकारी होगा, जिसे वोट देने का अधिकार नहीं रहेगा।
यह फैसला गोकुल दूध संघ के हालिया चुनाव परिणामों के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कांग्रेस विधायक सतेज पाटील के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था, जबकि महायुति समर्थित पैनल को 12 सीटें मिली थीं। इसके बावजूद अध्यक्ष का चुनाव नहीं हो सका। 29 अक्टूबर की बैठक में महायुति समर्थित संचालकों की अनुपस्थिति के कारण आवश्यक 14 सदस्यों का कोरम पूरा नहीं हुआ। इसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को दोबारा बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया।
सरकार के फैसले पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि चुनाव के बाद नियमों में बदलाव कर निर्वाचित संचालक मंडल का जनादेश प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की है। सतेज पाटील ने भी कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कही है।
वहीं, सरकार का तर्क है कि बड़े कारोबार वाली सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता, पेशेवर प्रबंधन और प्रशासनिक गतिरोध दूर करने के लिए यह बदलाव जरूरी है। अब इस फैसले पर कानूनी और राजनीतिक टकराव बढ़ने के आसार हैं।
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